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महाभारत के अर्जुन ने एक साल तक सिखाया था नृत्य, इस वजह से बने थे किन्नर

अर्जुन ने व्यास जी की सलाह को मान लिया और दिव्यअस्त्रों के ज्ञान के लिए इंद्र लोक चले गए। इंद्र लोक में भगवान इंद्र की अनुमति से वे कई सारी विद्याओं की शिक्षा लेने लगे।

Author नई दिल्ली | April 23, 2018 8:43 PM
महाभारत में अर्जुन। (प्रतीकात्मक)

महाकाव्य महाभारत के कई सारे प्रसंग बड़े ही प्रसिद्ध हैं। ये प्रसंग आए दिन साझा किए जाते रहते हैं और लोग बड़ी ही उत्सुकता के साथ इन्हें सुनते हैं। आज हम भी आपको महाभारत से जुड़ा एक बड़ा ही दिलचस्प प्रसंग सुनाने जा रहे हैं। यह प्रसंग उस घटनाक्रम का उल्लेख करता है जब अर्जुन ने एक साल तक नृत्य सिखाया था। इसके अलावा उन्होंने किन्नर रूप भी धारण किया था। आज हम जानेंगे कि इस दिलचस्प घटनाक्रम के पीछे क्या वजह रही। दरअसल इस घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त होती है जब पाण्डव वनवास पर थे। और दिन-रात इस बात की योजना बना रहे थे कि फिर से राज्य पाने के लिए क्या करना चाहिए।

अर्जुन इसी प्रश्न को लेकर महर्षि वेद व्यास के पास गए। व्यास जी ने उनसे कहा कि आपको इसके लिए दिव्यअस्त्रों का ज्ञान हासिल करना होगा। अर्जुन ने व्यास जी की सलाह को मान ली और दिव्यअस्त्रों के ज्ञान के लिए इंद्र लोक चले गए। इंद्र लोक में भगवान इंद्र की अनुमति से वे कई सारी विद्याओं की शिक्षा लेने लगे। चित्रसेन ने अर्जुन को संगीत और नृत्य की भी शिक्षा दी। कहते हैं कि इन्द्र की अप्सरा उर्वशी ने जब अर्जुन को देखा तो वह उनके प्रति आकर्षित हो गई।

उर्वशी ने अर्जुन से कहा, अर्जुन आपको देखकर मेरी काम-वासना जागृत हो गई है, इसलिए आप कृपया मेरे साथ विहार करके मेरी काम-वासना को शांत करें। उर्वशी की ऐसी बातें सुनकर अर्जुन ने कहा कि देवी हमारे पूर्वज ने आपसे विवाह करके हमारे वंश का गौरव बढ़ाया था। इसलिए पुरु वंश की जननी होने के नाते आप मेरी माता के समान हैं। ऐसे में मैं आपको प्रणाम करता हूं। अर्जुन की ये बातें सुनकर उर्वशी काफी आहत हुई।

उर्वशी ने कहा, “अर्जुन आपने नपुंसकों जैसे वचन कहे हैं, इसलिए मैं आपको श्राप देती हूँ कि आप एक वर्ष तक पुंसत्वहीन रहेंगे।” कहते हैं कि जब इंद्र को इस घटनाक्रम के बारे में पता चला तो उन्होंने अर्जुन के व्यवहार को गलत बताया। इंद्र ने बताया कि यह सब भगवान की इच्छा के अनुसार हो रहा है। अर्जुन, अपने एक वर्ष के अज्ञातवास के समय ही तुम पुंसत्वहीन रहोगे। इस श्राप के कारण ही अर्जुन ने किन्रर का रूप धारण किया था। इसके अलावा उन्होंने विराट नगर के राजा विराट की पुत्री उत्तरा को एक साल तक नृत्य सिखाया था।

 

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