ताज़ा खबर
 

केवल एक युद्ध हारे थे महाबली हनुमान, जानिए कौन था वह योद्धा?

धार्मिक मान्यता है कि हनुमान के बिना न तो राम हैं और न ही रामायण। राम-रावण युद्ध में हनुमान जी ही एकमात्र योद्धा थे जिन्हें कोई भी किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचा सका था।

Author नई दिल्ली | January 31, 2019 2:19 PM
महाबली हनुमान।

हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों में हनुमान जी को सबसे शक्तिशाली माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान के बिना न तो राम हैं और न ही रामायण। राम-रावण युद्ध में हनुमान जी ही एकमात्र योद्धा थे जिन्हें कोई भी किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचा सका था। यूं तो हनुमान जी के पराक्रम, सेवा, दया और दूसरों का दंभ तोड़ने की अनेक गाथाएं हैं, लेकिन हनुमान जी को भी एक बार युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था। सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है लेकिन पुराणों के अनुसार यह सही माना गया है। कहते हैं कि युद्द में हनुमान जी को हराने वाला कोई और नहीं बल्कि उनका भक्त ही था। जानते हैं यह रोचक प्रसंग।

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार किसी समय में मछिंद्रनाथ नाम के एक बहुत बड़े तपस्वी हुआ करते थे। एक बार जब वो रामेश्वरम में आए तो भगवान राम के द्वारा बनाया गया रामसेतु देखकर भाव-विभोर हो गए। जिसके बाद प्रभु राम की भक्ति में लीन होकर समुद्र में स्नान करने लगे। तभी वहां वानर वेश में उपस्थित हनुमान जी की नजर उस पर पड़ी। वे जानते थे कि मछिंद्रनाथ बहुत बड़े तपस्वी हैं। फिर भी उन्होंने मछिंद्रनाथ की परीक्षा लेनी चाही। इसलिए हनुमान जी ने अपनी लीला आरंभ की। जिससे वहां चारों ओर वर्षा होने लगी। ऐसे में वानर रूपी हनुमान बारिश से बचने के लिए एक पहाड़ पर वार कर गुफा बनाने का झूठ नाटक करने लगे। इसके पीछे उनका उद्देश्य था कि मछिंद्रनाथ का ध्यान टूटे और उनकी नजर उन पर पड़े। कुछ ही समय के बाद उनकी नजर उस वानर पर पड़ी और उन्होंने कहा कि ये वानर! तुम ऐसी मूर्खता क्यों कर रहे हो? प्यास लगने के वक्त कुआं नहीं खोदा जाता है। इससे पहले ही तुम्हें अपने रहने का सुरक्षित स्थान खोजना चाहिए था।

यह सुनकर वानर रूपी हनुमान ने मछिंद्रनाथ से पूछा कि आप कौन हैं? जिस पर मछिंद्रनाथ ने अपने बारे में बताया कि मैं एक सिद्ध योगी हूं और मुझे मंत्र शक्ति प्राप्त है। इसे सुनकर वानर रूपी हनुमान ने कहा कि वैसे तो श्रीराम और महाबली हनुमान से श्रेष्ठ योद्धा इस संसार में कोई नहीं है। लेकिन कुछ समय उनकी सेवा करने के कारण उन्होंने प्रसन्न होकर अपनी शक्ति का कुछ हिस्सा मुझे भी दिया है। यदि आपके पास इतनी शक्ति है और आप पहुंचे हुए सिद्ध योगी हैं तो युद्ध में मुझे हराकर दिखाएं। तभी मैं आपके तपोबल को सार्थक मनुंगा। इतना सुनकर मछिंद्रनाथ और हनुमान रूपी वानर में युद्ध की शुरुआत हो गई। जिसके बाद हनुमान जी की सारी शक्ति खत्म हो गई। हनुमान जी की दशा देखकर उनके पिता वायुदेव वहां पहुंचे और मछिंद्रनाथ से हनुमान को क्षमा करने का अनुरोध किया। कहते हैं कि इस युद्ध के अंत में हनुमान जी की हार हुई थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App