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Maha Shivratri Puja 2020 Date, Puja Vidhi: महादेव शिव की पूजा में किन सामग्रियों का करें प्रयोग, क्या है रुद्राभिषेक का तरीका

Maha Shivratri 2020 Date in India, Maha Shivaratri 2020 Date, Puja Vidhi, Muhurat (महाशिवरात्रि कब है): हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती का भगवान शिव के साथ विवाह हुआ था।

Maha Shivaratri 2020 Date in India: इस खास दिन पर 59 साल बाद शश योग बन रहा है।

Maha Shivratri 2020 Date in India, Maha Shivaratri 2020 Date, Puja Vidhi, Muhurat: देवों के देव महादेव की अराधना का सबसे विशेष दिन महाशिवरात्रि आज पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस खास दिन पर 59 साल बाद शश योग बन रहा है। इस दिन शनि और चंद्र मकर राशि में होंगे, गुरु धन राशि में, बुध कुंभ राशि में तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे। साथ ही शुभ कार्यों को संपन्न करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन बन रहा है। साधना सिद्धि के लिए भी ये योग खास माना जाता है।

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महाशिवरात्रि मुहूर्त (Mahashivratri Muhurat 2020):

महा शिवरात्रि शुक्रवार, फरवरी 21, 2020 को
निशिता काल पूजा समय – 12:09 ए एम से 01:00 ए एम, फरवरी 22
अवधि – 00 घण्टे 51 मिनट्स
22वाँ फरवरी को, शिवरात्रि पारण समय – 06:54 ए एम से 03:25 पी एम
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:15 पी एम से 09:25 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:25 पी एम से 12:34 ए एम, फरवरी 22
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:34 ए एम से 03:44 ए एम, फरवरी 22
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:44 ए एम से 06:54 ए एम, फरवरी 22
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – फरवरी 21, 2020 को 05:20 पी एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – फरवरी 22, 2020 को 07:02 पी एम बजे

Maha Shivratri 2020 Puja Vidhi, Samagri, Muhurat: शिव पूजा के लिए निशिता काल मुहूर्त है सबसे शुभ, जानिए किस विधि से करें महाशिवरात्रि पूजन

महाशिवरात्रि व्रत विधि: शिवरात्रि व्रत से एक दिन पहले यानी त्रयोदशी तिथि को भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। फिर शिवरात्रि के दिन रोजाना के कार्यों से फ्री होकर भक्तों को व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शिवरात्रि की पूजा शाम के समय या फिर रात्रि में करने का विधान है इसलिए भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पूजा रात्रि के समय एक बार या फिर चार बार की जा सकती है।

व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए भक्तों को सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के बीच के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए। लेकिन, एक अन्य मान्यता के अनुसार, व्रत के समापन का सही समय चतुर्दशी तिथि के पश्चात् का बताया गया है। महाशिवरात्रि से जुड़ी हर एक जानकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस ब्लॉग पर…

VIDEOS- कैसे, कब, क्यों करें शिव की पूजा और महाशिवरात्रि से जुड़े वीडियो यहां देखें

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Highlights

    18:20 (IST)21 Feb 2020
    Shiv Aarti (शिव आरती)...

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

    17:26 (IST)21 Feb 2020
    शिवरात्रि पूजा विधि...

    इस दिन शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. जल चढ़ाने के लिए सबसे पहले तांबे के एक लोटे में गंगाजल लें. अगर ज्‍यादा गंगाजल न हो तो सादे पानी में ही गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं. अब लोटे में चावल और सफेद चंदन मिलाएं और भगवान शिव को अर्पित करें. जल चढ़ाने के बाद पूजा की चावल, बेलपत्र, सुगंधित पुष्‍प, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्‍चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र चढ़ाएं.

    16:37 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri 2020: पूजन सामग्री : जल, दूध, दही, शहद और फूल

    धर्म विज्ञान शोध संस्थान के वैभव जोशी के अनुसार दूध में फैट, प्रोटीन, लैक्टिक एसिड, दही में विटामिन्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस और शहद में फ्रक्टोस, ग्लूकोज जैसे डाईसेक्राइड, ट्राईसेक्राइड, प्रोटीन, एंजाइम्स होते हैं। वहीं, दूध, दही और शहद शिवलिंग पर कवच बनाए रखते हैं। इसके साथ ही शिव मंत्रों से निकलने वाली ध्वनि सकारात्मक ऊर्जा को ब्रह्मांड में बढ़ाने का काम करती है। धर्म और विज्ञान पर अध्ययन करने वाली इस संस्था ने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाली चीजों की प्रकृति और उनमें पाए जाने वाले तत्वों की वैज्ञानिक व्याख्या के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।

    15:31 (IST)21 Feb 2020
    महाशिवरात्रि की व्रत कथा

    पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार प्राचीन काल में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था. जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था. वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका. क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लि.। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी. शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा. चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी. शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की. ....

    15:03 (IST)21 Feb 2020
    बिल्वपत्र से नियंत्रित होती है गर्मी

    बिल्वपत्र से गर्मी नियंत्रित होती है। इसमें टैनिन, लोह, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे रसायन होते हैं। इससे बिल्वपत्र की तासीर बहुत शीतल होती है। तपिश से बचने के लिए इसका उपयोग फायदेमंद होता है। बिल्वपत्र का औषधीय उपयोग करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। पेट के कीड़े खत्म होते हैं और शरीर की गर्मी नियंत्रित होती है।

    14:23 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri Puja 2020: ये रहेगा मुहूर्त

    माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि भी कहा गया है। महाशिवरात्रि को की गई पूजा-अर्चना, जप दान आदि का फल कई गुना होता है।

    13:44 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri 2020: जीवन के हर रूप को खुलकर जीना

    शिव की जीवन शैली हो या उनका कोई अवतार, वे हर रूप में बिल्कुल अलग हैं। फिर वो रूप तांडव करते हुए नटराज हो, विष पीने वाले नीलकंठ, अर्धनारीश्वर, सबसे पहले प्रसन्न  होने वाले भोलेनाथ का हो। वे हर रूप में जीवन को सही राह देते हैं।

    13:11 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri Puja 2020: क्या है रूद्राभिषेक

    रूद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रूद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। यह पवित्र-स्नान रूद्ररूप शिव को कराया जाता है। अभिषेक के कई रूप व प्रकार होते हैं। शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा तरीका है रुद्राभिषेक करना। जटा में गंगा को धारण करने से भगवान शिव को जलधारा प्रिय है। 

    12:37 (IST)21 Feb 2020
    महाशिवरात्रि पर बना दुर्लभ योग कई दोषों से दिलायेगा मुक्ति...

    ज्योतिष मुताबिक इस बार महाशिवरात्रि के दिन 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग भी बन रहा है। इस दिन शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। यह एक दुर्लभ योग माना गया है, जब ये दोनों बड़े ग्रह महाशिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। इस योग में भगवान शिव की आराधना करने पर शनि के साथ-साथ गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकेगी।

    12:08 (IST)21 Feb 2020
    शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाते समय ये गलती करने से बचें...

    प्रसाद चढ़ाते समय बरतें सावधानी: शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग के ऊपर प्रसाद न रखें। माना जाता है कि शिवलिंग के ऊपर रखा गया प्रसाद ग्रहण नहीं होता जिससे पूजा अधूरी मानी जाती है।

    11:33 (IST)21 Feb 2020
    महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त...

    अभिजित मुहूर्त- 12:12 पी एम से 12:58 पी एम, अमृत काल- 12:01 ए एम, फरवरी 22 से 01:45 ए एम, फरवरी 22 तक, सर्वार्थ सिद्धि योग – 09:14 ए एम से 06:54 ए एम, फरवरी 22 तक, विजय मुहूर्त – 02:28 पी एम से 03:14 पी एम, गोधूलि मुहूर्त- 06:04 पी एम से 06:28 पी एम, ब्रह्म मुहूर्त- 05:13 ए एम, फरवरी 22 से 06:03 ए एम, फरवरी 22 तक, सायाह्न सन्ध्या- 06:15 पी एम से 07:31 पी एम, निशिता मुहूर्त- 12:09 ए एम, फरवरी 22 से 01:00 ए एम, फरवरी 22 तक, प्रातः सन्ध्या- 05:38 ए एम, फरवरी 22 से 06:54 ए एम, फरवरी 22 तक।

    11:05 (IST)21 Feb 2020
    शिव का ध्यान लगाने के लिए क्या करें...

    भक्त को चाहिए कि वह शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव महिम्नस्तोत्र, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव पुराण आदि का पाठ करना चाहिए। यदि उपक्त पाठ करने में किसी प्रकार की बाधा हो रही हो तो पंचाक्षरी मंत्र 'नम:शिवाय' का जप ही निरंतर करना चाहिए। महाशिवरात्रि में जागरण करना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।

    10:41 (IST)21 Feb 2020
    महाशिवरात्रि पूजा विधि (Maha Shivratri Puja Vidhi)...

    1. महाशिवरात्रि के दिन शिव का पूजन पंचामृत से किया जाता है. माना जाता है क‍ि सबसे पहले पंचामृत से शिवलिंग का स्नान कराएं. 2. स्‍नान के बाद चंदन का तिलक लगाया जाता है3. इसके बाद जल चढ़ाया जाता है. 4. इसके बाद बेलपत्र, भांग धतूरा, तुलसी, जायफल, फल, मिठाई, पान वगैरह अर्पित किया जाता है.5. इस शिवरात्र‍ि पर केसर की खीर का भोग लगाया जाता है. 6. इसके बाद अखंड़ जोत जगाई जाती है.7. पूजा में ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.

    10:12 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri 2020 (महाशिवरात्रि पूजा सामग्री)...

    महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए जरूरी सामग्री- बेल पत्र, धतूरा, भांग, फूल, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रुई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्‍ठान, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा.

    09:45 (IST)21 Feb 2020
    महाशिवरात्रि व्रत विधि (Shivratri Vrat Vidhi)...

    शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करना चाहिए या मन्दिर जाना चाहिए। शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए एवं अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत छोड़ना चाहिए। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु, भक्तों को सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए। लेकिन, एक अन्य धारणा के अनुसार, व्रत के समापन का सही समय चतुर्दशी तिथि के पश्चात् का बताया गया है। दोनों ही अवधारणा परस्पर विरोधी हैं। लेकिन, ऐसा माना जाता है की, शिव पूजा और पारण (व्रत का समापन), दोनों की चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए।

    09:13 (IST)21 Feb 2020
    Maha Shivratri Puja Muhurat (महाशिवरात्रि पर शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त)...

    आज महाशिवरात्रि है। शिवरात्रि की पूजा रात में करना ज्यादा फलदायी माना गया है। पंचांग अनुसार पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 12:09 ए एम से 01:00 ए एम, फरवरी 22 तक रहेगा।

     
    08:55 (IST)21 Feb 2020
    उज्जैन के महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व की रौनक...
    08:37 (IST)21 Feb 2020
    Shivratri Puja Vidhi (शिवरात्रि पूजा विधि)...

    - शिव रात्रि के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं। - उसके बाद भगवान शंकर को केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं।- इस दिन पूरी रात दीपक जलाकर रखें। - भगवान शंकर को चंदन का तिलक लगाएं।- तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।- पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

    08:10 (IST)21 Feb 2020
    117 साल बाद दुर्लभ योग महाशिवरात्रि पर...

    इस बार महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। उस दिन शनि अपनी राशि मकर व शुक्र उच्च राशि मीन में रहेंगे। भगवान शिव की अराधना से गुरु, शुक्र और शनि के दोषों से मुक्ति मिलेगी। शुक्रवार को ही बुध व सूर्य एक साथ कुंभ राशि में होंगे। इससे बुधादित्य योग बन रहा है। बीते 18 फरवरी से पांच मार्च तक कालसर्प योग है। यह समय कालसर्प योग से निवारण के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन रूद्राभिषेक करने से पातन कर्म भस्म हो जाते हैं। साधक में शिवत्व का उदय होता है। इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एक मात्र सदाशिव रूद्र के पूजन से सभी देवी-देवताओं की पूजा हो जाती है।

    07:42 (IST)21 Feb 2020
    21 February panchang: पंचांग से जानिए शिवरात्रि पूजा का मुहूर्त...

    आज महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2020) है यानी शिव शंकर की पूजा का खास दिन। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन शिव आधी रात में लिंग रूप में पहली बार प्रकट हुए थे। इस लिंग की सबसे पहले पूजा भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने की थी। खास बात ये है कि शिवरात्रि (Shivratri) के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस शुभ मुहूर्त में कार्य करने से सफलता हासिल होती है। जानिए महाशिवरात्रि का पूरा पंचांग…

    06:35 (IST)21 Feb 2020
    दुनिया को आग और विष से बचाने पर नीलकंठ कहलाए शिव

    भागवत् पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग के मुख में भयंकर विष की ज्वालाएं उठी और वे समुद्र में मिश्रित हो विष के रूप में प्रकट हो गई। विष की यह आग की ज्वालाएं पूरे आकाश में फैलकर सारे जगत को जलाने लगी। इसके बाद सभी देवता, ऋषि-मुनि भगवान शिव के पास मदद के लिए गए। इसके बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए और उस विष को पी लिया। इसके बाद से ही उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। 

    05:01 (IST)21 Feb 2020
    शिवरात्रि पर व्रत रखने वाले चतुर्दशी तिथि के पश्चात ही पारण करें

    शिवरात्रि पर व्रत रखने वाले भक्तों को विधान के अनुसार चतुर्दशी तिथि के पश्चात ही पारण करना चाहिए। व्रत में तन की शुद्धता के साथ मन की शुद्धता बहुत जरूरी है। 

    03:41 (IST)21 Feb 2020
    शिव की आराधना करने वालों को जाप करना चाहिए

    भगवान शिव की आराधना करने वालों को भगवान शिव का जाप करना चाहिए। इससे उन्हें शांति मिलेगी, साथ ही संकट का निवारण भी होगा।

    00:11 (IST)21 Feb 2020
    शिव मंदिर में पवित्रता से जाएं

    शिव मंदिर में पूजा के लिए जाने से पहले अपने को पवित्र कर लें। स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। दूध और बेलपत्र अवश्य लेकर जाएं। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। 

    22:42 (IST)20 Feb 2020
    महादेव की कृपा पाने के उपाय

    - महादेव के जलाभिषेक के दौरान शिवलिंग को अपने हाथो से अच्छी तरह स्पर्श करें.- वाहन सुख पाने के लिए रोजाना शिवलिंग पर चमेली का फूल अर्पित करें.- शिव मंदिर में रोजाना संध्याकाल में एक दीपक प्रज्जवलित करें.- बेलपत्र पर चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें.

    22:30 (IST)20 Feb 2020
    बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र

    नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने चनमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌। अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌। कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर। सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय।

    22:06 (IST)20 Feb 2020
    शिवरात्रि – महीने का सबसे ज्यादा अँधेरे से भरा दिन

    शिवरात्रि माह का सबसे अंधकारपूर्ण दिवस होता है। प्रत्येक माह शिवरात्रि का उत्सव तथा महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो हम अंधकार का उत्सव मना रहे हों। कोई तर्कशील मन अंधकार को नकारते हुए, प्रकाश को सहज भाव से चुनना चाहेगा। परंतु शिव का शाब्दिक अर्थ ही यही है, ‘जो नहीं है’। ‘जो है’, वह अस्तित्व और सृजन है। ‘जो नहीं है’, वह शिव है। ‘जो नहीं है’, उसका अर्थ है, अगर आप अपनी आँखें खोल कर आसपास देखें और आपके पास सूक्ष्म दृष्टि है तो आप बहुत सारी रचना देख सकेंगे। अगर आपकी दृष्टि केवल विशाल वस्तुओं पर जाती है, तो आप देखेंगे कि विशालतम शून्य ही, अस्तित्व की सबसे बड़ी उपस्थिति है। कुछ ऐसे बिंदु, जिन्हें हम आकाशगंगा कहते हैं, वे तो दिखाई देते हैं, परंतु उन्हें थामे रहने वाली विशाल शून्यता सभी लोगों को दिखाई नहीं देती। 

    21:36 (IST)20 Feb 2020
    Maha Shivratri Puja 2020: पूजा में बेलपत्र ऐसे चढाने का नियम

    शिवजी की पूजा में बेल के पत्तों का बड़ा ही महत्व है। बेल को साक्षात् शिव स्वरूप बताया गया है। महाशिवरात्रि व्रत की कथा में बताया गया है कि एक शिकारी वन्य जीवों के डर से बेल के वृक्ष पर रात पर बैठा रहा और नींद ना आए इसलिए बेल के पत्तों को तोड़कर नीचे फेंकता रहा। संयोगवश उस स्थान पर शिवलिंग था। रात भर बेल के पत्ते उस शिवलिंग पर गिराते रहने से शिकारी के सामने भगवान शिव प्रकट हो गए और व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बन गया। शिव पुराण में कहा गया है कि तीन पत्तों वाला शिवलिंग जो कट फटा ना हो उसे शिवलिंग पर चढ़ाने से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है। वैसे तो एक बेलपत्र अर्पित करने से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन संभव हो तो 11 या 51 बेलपत्र जरूर चढ़ाएं।

    20:30 (IST)20 Feb 2020
    Maha Shivratri 2020: क्षति से बचाएगा अक्षत

    भगवान शिव ने अपनी पूजा में अक्षत के प्रयोग को महत्वपूर्ण बताया है। शिवलिंग के ऊपर अटूट चावल जरूर चढाएं। अगर संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र में अटूट चावल सवा मुट्ठी रखकर शिवजी का अभिषेक करने के बाद शिवलिंग के पास रख दें। इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र अथवा ओम नमः शिवाय मंत्र का जितना अधिक संभव हो जप करें। इस विधि से शिवलिंग की पूजा गृहस्थों के लिए शुभ माना गया है इससे आर्थिक समस्या दूर होती है।

    20:14 (IST)20 Feb 2020
    Maha Shivratri Puja 2020: शिवजी का अभिषेक

    शिव पुराण में बताया गया है कि दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने पर भगवान भोलेनाथ अति प्रसन्न होते हैं। अगर आप इनमें से कोई वस्तु नहीं अर्पित कर पाते तो केवल जल में गंगाजल मिलाकर ही शिवजी का भक्ति भाव से अभिषेक करें। अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहना चाहिए।

    19:43 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि की पूजा विधि-

    शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करा कराएं. केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं. पूरी रात्रि का दीपक जलाएं. चंदन का तिलक लगाएं. तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें. पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें.

    19:19 (IST)20 Feb 2020
    क्‍यों मनाई जाती है शिवरात्रि?

    एक पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे. मान्‍यता है कि शिव जी अग्नि ज्‍योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हु थे, जिसका न आदि था और न ही अंत. कहते हैं कि इस शिवलिंग के बारे में जानने के लिए सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण किया और उसके ऊपरी भाग तक जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन उन्‍हें सफलता नहीं मिली.  वहीं, सृष्टि के पालनहार विष्‍णु ने भी वराह रूप धारण कर उस शिवलिंग का आधार ढूंढना शुरू किया लेकिन वो भी असफल रहे. 

    18:49 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि कथा :-

    समुद्र मंथन के दौरान जब देवतागण एवं असुर पक्ष अमृत-प्राप्ति के लिए मंथन कर रहे थे, तभी समुद्र में से कालकूट नामक भयंकर विष निकला। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने भयंकर विष को अपने शंख में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गए। भगवान विष्णु अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं। उन्होंने उस विष को शिवजी के कंठ (गले) में ही रोक कर उसका प्रभाव समाप्त कर दिया। विष के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे संसार में नीलंकठ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

    18:07 (IST)20 Feb 2020
    रात्रि पूजा का विधान :-

    दिनभर अधिकारानुसार शिवमंत्र का यथाशक्ति जप करना चाहिए अर्थात्‌ जो द्विज हैं और जिनका विधिवत यज्ञापवीत संस्कार हुआ है तथा नियमपूर्वक यज्ञोपवीत धारण करते हैं। उन्हें ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए परंतु जो द्विजेतर अनुपनीत एवं स्त्रियां हैं, उन्हें प्रणवरहित केवल शिवाय नमः मंत्र का ही जप करना चाहिए। रुग्ण, अशक्त और वृद्धजन दिन में फलाहार ग्रहण कर रात्रि पूजा कर सकते हैं, वैसे यथाशक्ति बिना फलाहार ग्रहण किए रात्रिपूजा करना उत्तम है। रात्रि के चारों प्रहरों की पूजा का विधान शास्त्रकारों ने किया है। सायंकाल स्नान करके किसी शिवमंदिर जाकर अथवा घर पर ही सुविधानुसार पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर और तिलक एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का इस प्रकार संकल्प करे-देशकाल का संकीर्तन करने के अनंतर बोले- 'ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थ च शिवपूजनमहं करिष्ये।' 

    17:43 (IST)20 Feb 2020
    शिवलिंग की गलत परिक्रमा न लगाएं...

    भगवान शिव की आधी परिक्रमा लगाई जाती है। ध्यान रखें कि शिवलिंग के बाईं तरफ से परिक्रमा शुरू करनी चाहिए और जहां से भगवान को चढ़ाया जल बाहर निकलता है, वहां से वापस लौट आएं। उसे कभी भी लांघना नहीं चाहिए। फिर विपरित दिशा में जाकर जलाधारी के दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें।

    17:19 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि के पर्व पर घर बैठे करें शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन...

    सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात के काठियावाड़ा क्षेत्र में समुद्र किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहां चंद्रमा ने भगवान शिव को आराध्य मानकर पूजा की थी, इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ गया। जो चंद्र का ही एक नाम है। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थीसभी ज्योतिर्लिंगों के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें

    16:48 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि के महत्व को समझिए इस पावन कथा से...

    महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस साल 21 फरवरी को मनाया जायेगा। अन्य शिवरात्रि से इस महाशिवरात्रि को क्यों माना गया है खास इसके महत्व को जानने के लिए इस पौराणिक कथा को जानना जरूरी है जिसके अनुसार प्राचीन काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। वह जानवरों की हत्या करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर चुका न सका। इससे क्रोधित साहूकार ने चित्रभानु को पकड़कर कैद कर लिया। संयोग से उस दिन महाशिवरात्रि थी। पूरी कथा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    16:29 (IST)20 Feb 2020
    शिव को क्यों प्रिय है भांग...

    भांग: महादेव हमेशा ध्यानमग्न मुद्रा में रहते हैं। भांग ध्यान केंद्रित करने में मददगार होती है। समुद्र मंथन में निकले विष का सेवन करने के बाद महादेव को औषधि स्वरूप भांग दी गई। लेकिन प्रभु ने हर कड़वाहट और नकारात्मकता को आत्मसात किया इसलिए भांग भी उन्हें प्रिय है। भगवान शिव संसार में व्याप्त हर बुराई और हर नकारात्मक चीज को अपने भीतर ग्रहण कर लेते हैं।

    16:09 (IST)20 Feb 2020
    भगवान शिव की पूजा विधि (Shiv Puja Vidhi)...

    इस दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नान कर लेना चाहिए। इसके अलावा, महा शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे समय ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। सुबह-सुबह मंदिर जाकर भगवान शिव की अराधना के साथ ही दूध, शहद और पानी से अभिषेक करने से भी शिव जी खुश होते हैं। इसके अलावा, बेलपत्र, भांग, धतूरा भी उन्हें बेहद प्रिय हैं। व्रतियों को पूरे दिन बिना खाए शिव जी की पूजा में लीन रहना चाहिए और शाम होने के बाद स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर उनकी आरती में शामिल होना चाहिए। घर में भी लोगों को शाम में पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके त्रिपुंड और रुद्राक्ष पहनकर पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा, शिवपुराण में रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विधान है जिसमें भक्तों को फल, फूल, चंदन, बेलपत्र, धतूरा और दीप-धूप से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

    15:42 (IST)20 Feb 2020
    जानिए क्यों प्रिय है भगवान शिव को धतूरा...

    धतूरा: भगवान शिव को धतूरा चढ़ाने के पीछे जहां धार्मिक कारण है वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी है। जैसा कि भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत माना गया है। यह काफी ठंडा क्षेत्र है जहां ऐसे आहार और औषधि की जरुरत होती है जो शरीर को ऊष्मा प्रदान कर सकें। वैज्ञानिक दृष्टि से धतूरा सीमित मात्रा में लेने से ये औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है। जबकि धार्मिक मान्यताओं अनुसार देवी भागवत‍ पुराण में बताया गया है। शिव जी ने जब सागर मंथन से निकले हलाहल विष को पी लिया तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता दूर की।

    15:07 (IST)20 Feb 2020
    केतकी के फूल शिव की पूजा में न करें इस्तेमाल...

    पौराणिक कथा के अनुसार केतकी के फूल को भोलेनाथ ने श्राप दिया था कि उनकी पूजा में कभी इनका इस्तेमाल नहीं किया जायेगा। क्योंकि केतकी के फूलों ने ब्रह्मा जी के एक झूठ में साथ दिया था।

    13:59 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि शश योग के बनने की वजह से रहेगी खास...

    महाशिवरात्रि पर शश योग: ज्योतिष शास्त्र अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर शश योग बन रहा है। इस दिन पांच ग्रहों की पुनरावृत्ति होने के साथ ही शनि और चंद्र मकर राशि में तो गुरु धनु में, बुध कुंभ राशि में तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे। कहा जा रहा है इससे पहले ऐसा योग आज से 59 वर्ष पूर्व यानी कि साल 1961 में बना था। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस योग में साधना सिद्धि करने से विशेष फल प्राप्त होता है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। शुभ कार्यों को संपन्न करने के लिए यह योग खास माना जाता है।

    13:28 (IST)20 Feb 2020
    शिव के 12 ज्योतिर्लिंग...

    पहला: सोमनाथ यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।

    दूसरा: श्री शैल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है।

    तीसरा: ये महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग।

    चौथा: ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता पर्वत पर स्थित है।

    पांचवां: नागेश्वर गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।

    13:28 (IST)20 Feb 2020
    शिव के 12 ज्योतिर्लिंग...

    छठवां: बैजनाथ बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित ज्योतिर्लिंग।

    सातवां: भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।

    आठवां: त्रर्यंम्बकेश्वर नासिक से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।

    नवां: घुमेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के पास वेसल गांव में स्थापित घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग।

    दसवां: हरिद्वार से 150 पर मिल दूर, केदारनाथ में हिमालय पर्वत पर स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग।

    ग्यारहवां: बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।

    बारहवां: रामेश्वरम्‌ में त्रिचनापल्ली समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।

    12:54 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि के चारों प्रहर की पूजा का समय...

    रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:15 पी एम से 09:25 पी एमरात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:25 पी एम से 12:34 ए एम, फरवरी 22रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:34 ए एम से 03:44 ए एम, फरवरी 22रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:44 ए एम से 06:54 ए एम, फरवरी 22

    12:34 (IST)20 Feb 2020
    शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग न करें...

    शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग कभी नहीं किया जाता। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने वृंदा के पति जलंधर का वध किया था, इसमें भगवान विष्णु ने जलंधर का रुप धारण करके वृंदा के पतिव्रता धर्म को तोड़ दिया था। यह बात जानने पर वृंदा ने आत्मदाह कर लिया, उस जगह पर तुलसी का पौधा उग गया। वृंदा ने शिव पूजा में तुलसी के न शामिल होने की बात कही थी।

    12:04 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार पूजन करना माना गया है फलदायी...

    महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) का पावन पर्व आने में अब कुछ ही दिनों का समय शेष रह गया है। साल में आने वाली सभी 12 शिवरात्रि शिव भक्तों के लिए खास होती है लेकिन इस महाशिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व माना गया है जो साल में एक ही बार आती है। मान्यता है कि इस फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आधी रात में भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। जिस कारण इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। जानिए इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार क्या उपाय करें…Mahashivratri Puja According To Zodiac Sign 

    11:36 (IST)20 Feb 2020
    भगवान शिव को क्यों प्रिय है रुद्राभिषेक...

    महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक के बारे में यजुर्वेद रुद्राष्टाध्यायी में वर्णन मिलता है। जिसके मुताबिक शिव ही रुद्र हैं। रुद्राभिषेक का अर्थ रुद्र यानि शिव का अभिषेक करना है। मान्यता है कि शिव के माथे पर गंगा विराजमान होने के कारण उन्हें रुद्राभिषेक के तौर पर गंगाजल से स्नान करना प्रिय है। इसके अलावा मान्यता ये भी है कि जब भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई तब वे इसका कारण जानने के लिए विष्णु जी के पास पहुंचे। भगवान विष्णु जी ने जब उनकी उत्पत्ति के बारे में कहा तो वे संतुष्ट नहीं हुए और दोनों में युद्ध हुआ। जिसके बाद रुद्र शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। जब ब्रह्मा जी को शिवलिंग का कोई आदि और अंत के बारे में पता नहीं चला तो उन्होंने शिवलिंग का अभिषेक किया। जिसके बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए। कहते हैं कि उसके बाद से ही रुद्राभिषेक शुरू हुआ। शुक्ल यजुर्वेद में वर्णिक विधि के अनुसार रुद्राभिषेक श्रेष्ठ बताया गया है।

    11:14 (IST)20 Feb 2020
    शिवलिंग की ऐसे लगानी चाहिए परिक्रमा...

    मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद परिक्रमा बेहद जरूरी माना जाता है, अन्‍यथा भगवान के दर्शन पूर्ण नहीं माने जाते। मगर भगवान शिव के मंदिर में याद रखें कि आधी करके वापस लौट जाएं। परिक्रमा हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर से शुरू करें और जहां से भगवान को चढ़ाया जल बाहर निकलता है, वहां तक जाकर वापस आ जाएं और फिर विपरीत दिशा में जाकर जलाधारी के दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा को पूरा करें।

    10:51 (IST)20 Feb 2020
    महाशिवरात्रि की पूजा विधि (Maha Shivratri Puja Vidhi)...

    महाशिवरात्रि के प्रात:काल स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर सारी जरूरी सामग्री रख लें। ध्यान रखें कि पूजा के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रहना चाहिए। अब आप वेदी पर कलश स्थापना करके भगवान शिव एवं नंदी की मूर्ति स्थापित करें। अब ए​क पात्र में जल भरकर पंचामृत बनाएं। अब भगवान शिव को जल से अभिषेक करें और भांग, धतुरा, शमी का पत्ता, बेलपत्र, अक्षत्, गाय का दूध, लौंग, चंदन, कमलगट्टा समेत अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। नंदी को भी पूजा सामग्री चढ़ाएं। धूप, गंध आदि भगवान शिव को चढ़ाएं। बेलपत्र को उल्टा करके भगवान शिव पर चढ़ाएं। ये सभी वस्तुएं अर्पित करते समय ओम नम: शिवाय मंत्रोच्चार करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में कपूर या गाय के घी वाले दीपक से भगवान शिव की आरती उतारें। महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखें और फलाहार करते हुए सायंकाल या रात्रिकाल में शिवजी की स्तुति पाठ करें। रात्रि जागरण करते हैं तो चार आरती के विधान का पालन करें। इस दिन शिव पुराण का पाठ करें तो भी उत्तम होगा।

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