Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj On Lord Shiva Naam Jaap: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ मां पार्वती की विधिवत पूजा करने से वह अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि, खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। हर साधक भगवान की कृपा पाने के लिए विभिन्न उपाय अपनाते हैं। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ऊं नम: शिवाय: से लेकर विभिनिन मंत्रों का जाप करते हैं। लेकिन कई बार हमारे मन में सवाल उठता है कि भगवान शिव को कौन सा मंत्र अति प्रिय है। जिसका जाप आप आसानी से कर सकते हैं। ऐसे ही प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो हैं, जिसमें वह एकांतित वार्ता के दौरान एक व्यक्ति ने पूछा कि महादेव के किस नाम का जाप करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। आइए जानते हैं प्रेमानंद महाराज ने क्या उत्तर दिया…

प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि यह वाणी पूर्णतया भावपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभवों से भरी हुई है। इसमें भक्त महादेव की करुणा, कृपा और उनकी अद्वितीयता का वर्णन कर रहे हैं। महादेव इतने सरल और दयालु हैं कि छोटी-सी भेंट या थोड़े से प्रेम से भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। वे देवों के देव हैं और सामान्यतः किसी को तुरंत स्वीकार नहीं करते, लेकिन यदि किसी को अपना भक्त बना लें, तो उसे अत्यंत उच्च स्थान और विशेष कृपा देते हैं।

महादेव अत्यंत दयालु, सहज प्रसन्न, करुणा के सागर और उदार हैं। भगवान हरि और भगवान शिव के बीच गहरा प्रेम है। जो हरि का भक्त होता है, वह शिव का भी भक्त बन जाता है। इसलिए यदि आपका इष्ट देव महादेव हैं और आपके जप के मंत्र भी उनके हैं, तो आपको और किसी नाम जपने की आवश्यकता नहीं। बल्कि आप सीधे महादेव में ही अपने समर्पण और भक्ति को केंद्रित कर सकते हैं। अगर कोई शिव की निंदा कर हरि भक्ति चाहे या हरि की अवहेलना कर शिव प्रेम चाहे, तो यह संभव नहीं। भगवान श्रीराम ने भी अयोध्यावासियों से हाथ जोड़कर कहा था कि शिव भजन के बिना उनकी भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती। इसी प्रकार भगवान शंकर परम वैष्णव आचार्य हैं वे ज्ञानियों और भक्तों दोनों के गुरु हैं।

भगवान शिव के किस मंत्र का जाप करना हो सकता है फलदायी

प्रेमानंद महाराज आगे वीडियो में कहते हैं कि देवाधिदेव महादेव तो ऐसे हैं कि एक चुल्लू जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। जिन्हें संसार ठुकरा दे, उन्हें भी वे स्वीकार कर दुर्लभ पद प्रदान कर देते हैं। वे अत्यंत कृपालु, आशुतोष, दयालु और करुणा के सागर हैं। उनकी पूजा में किसी वैभव या महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। बल्कि धतूरा, बिल्व पत्र, आक का फूल और श्रद्धा से अर्पित जल ही उन्हें प्रिय है। उनकी आराधना से ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और इच्छित ऐश्वर्य सब कुछ प्राप्त हो सकता है।

प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि “सांब सदाशिव, सांब सदाशिव, सांब सदाशिव, सांब सदाशिव” का नाम जप केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। इस जाप में माता उमा और महादेव दोनों की उपस्थिति और कृपा समाहित है।

सांब सदाशिव हमारे असली माता-पिता हैं, सम्पूर्ण जगत के पालनहार। वे अत्यंत करुणामय और दयालु हैं, लेकिन यदि कोई दुष्टता करता है या उन्हें अनादर करता है, तो वही शिव रुद्र बनकर न्याय और संहार भी करते हैं। वे अद्वैत शिव हैं, समस्त सृष्टि के एकमात्र स्वामी। ब्रह्मा रूप में सृजन करते हैं, हरि रूप में पालन करते हैं और रुद्र रूप में संहार करते हैं। यही वे लय और समय के अधिपति हैं, जिनकी शक्ति और कृपा दोनों अपरंपार हैं।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर काफी शुभ राजयोगों का निर्माण होने वाला है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य से लेकर नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा, जिससे 12 में से इन तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। जानें इन लकी राशियों के बारे में

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डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं और प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या उपाय को अपनी व्यक्तिगत आस्था और विवेक के आधार पर ही अपनाएं।