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Maha Shivratri 2020: आज है महाशिवरात्रि, घर बैठे करें शिव के इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन

Maha Shivratri 2020 Jyotirling Darshan: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात के काठियावाड़ा क्षेत्र में समुद्र किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहां चंद्रमा ने भगवान शिव को आराध्य मानकर पूजा की थी, इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ गया। जो चंद्र का ही एक नाम है। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी।

महाशिवरात्रि 2020: जानिए शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में…

Mahashivratri (महाशिवरात्रि) 2020, Shiv Jyotirlinga In India: यूं तो शिव के अनेकों मंदिर है लेकिन इनके 12 ज्योर्तिलिंग का विशेष महत्व माना गया है। इन ज्योर्तिलिंगों पर वैसे तो हमेशा भक्तों की भीड़ उमड़ी रहती है लेकिन कुछ  खास दिन ऐसे होते हैं जब यहां विशेष तौर पर लोग दर्शन के लिए आते हैं। ऐसा ही एक दिन है महाशिवरात्रि का। जिसे भोलेनाथ के जन्म दिवस के तौर पर देखा जाता है। कुछ का मानना है कि इसी दिन शिव शंकर का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। जानिए शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में…

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: गुजरात के काठियावाड़ा क्षेत्र में समुद्र किनारे स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहां चंद्रमा ने भगवान शिव को आराध्य मानकर पूजा की थी, इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ गया। जो चंद्र का ही एक नाम है। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: ये आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्ण नदी के तट पर स्थित है। इसे दक्षिणा का कैलाश भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। महाभारत के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है।महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: शिव का ये तीसरा ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह शिव का स्वयं-भू एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। इसे महाकाल के नाम से भी जाना जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: यह मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता पर्वत पर स्थित है। यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। दोनों ही शिवलिंगों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग हिमालय की चोटी पर विराजमान है। श्री केदारनाथ को ‘केदारेश्वर’ भी कहा जाता है, जो केदार शिखर पर विराजमान हैं। इस शिखर से पूर्व दिशा में अलकनंदा नदी के किनारे भगवान श्री बद्री विशाल का मंदिर भी है। केदारनाथ भगवान का दर्शन करने के बाद बद्रीनाथ की यात्रा करना जरूरी माना गया है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में है। इस मंदिर के पास भीमा नामक नदी बहती है। यहां स्थित शिवलिंग बहुत ही मोटा है। जिस कारण कि इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: यह ज्योतिर्लिंग धर्म नगरी काशी में स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने कैलाश पर्वत को छोड़कर इस स्थान को अपना स्थायी निवास बनाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां काशी में भगवान शिव साक्षात विराजमान हैं जिस कारण प्रलय आने के बाद भी इस शहर को कुछ नहीं होगा।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: ये महाराष्ट्र के नासिक जिले में पंचवटी से लगभग 18 मील की दूरी पर है। यहां ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी का विशेष महत्व माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर काले पत्थरों से बना हुआ है।

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: ये ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। जिसे बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में इस जगह को चिताभूमि कहा गया है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: नागेश ज्योतिर्लिंग गुजरात के बड़ौदा में गोमती द्वारका के पास स्थित है। नागों के ईश्वर को नागेश्वर कहते हैं और शिव नागों के देवता हैं।

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग: ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने खुद इसकी स्थापना की थी। यह तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है और ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग है। यह हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है।

घृश्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: यह महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग को घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि घुश्मा के मृत पुत्र को जीवित करने के लिए अवतरित प्रभु शिव ही घुमेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से जाने जाते हैं।

महाशिवरात्रि पूजा का मुहूर्त: निशिता काल पूजा समय – 12:09 ए एम से 01:00 ए एम, फरवरी 22 तक।

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