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Navami 2018: महानवमी का व्रत करने से पूरे 9 दिनों का फल मिलने की है मान्यता, जानिए विधि

Maha Durga Navami 2018: शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन को महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि केवल नवमी के दिन ही मां की उपासना करने से संपूर्ण नवरात्र का फल मिल जाता है।

महानवमी के दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यह अपने भक्तों को समस्त सिद्धियों का वरदान देने के लिए जानी जाती हैं।

शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन को महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि केवल नवमी के दिन ही मां की उपासना करने से संपूर्ण नवरात्र का फल मिल जाता है। इसीलिए, जो लोग 9 दिनों का व्रत नहीं रखते वे 9वें दिन उपवास करते हैं। महानवमी के दिन ही महासरस्वती की भी उपासना की जाती है जिससे अद्भुत विद्या और बुद्धि प्राप्त होती है। इस साल महानवमी 17 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसी दिन अष्टमी भी है लेकिन दोपहर 12:49 बजे से नवमी लग जाएगी। यह अगले दिन दोपहर 3 बजे कर रहेगी।

मां सिद्धिदात्री की पूजा – महानवमी के दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यह अपने भक्तों को समस्त सिद्धियों का वरदान देने के लिए जानी जाती हैं। यह कमल के आसन पर विराजमान हैं और अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा कमल पुष्प धारण किए हैं। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से नवरात्रि के 9दिनों का फल प्राप्त होता है।

महानवमी का महत्व – मां सिद्धिदात्री का पूजन करने वाला दिन महानवमी नवरात्र में बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन माता का पूजन करने से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही नवरात्र के 9 दिनों का फल इसी दिन प्राप्त हो सकता है। मार्कंडेय पुराण के मुताबिक 8 सिद्धियां (अणिमा, लघिमा, महिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, वशित्व और ईशित्व) होती हैं। मां सिद्धिदात्री की ही कृपा से भगवान शिव को भी ये सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। ऐसे में महानवमी के दिन मां की अराधना से उन्हें प्रसन्न कर समस्त सिद्धियों को प्राप्त किया जा सकता है।

अनाजों का लगाएं भोग – देवी सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए अनाजों का भोग लगाना चाहिए। हलवा, चना-पूड़ी, खीर, पुए इत्यादि मां को भोग लगाकर गरीबों को दान करना चाहिए। इससे जीवन सुखमय होता है। साथ ही माता को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए –

सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पूजा विधि: सबसे पहले मां सिद्धिदात्री के समक्ष दीपक जलाएं। अब मां को लाल रंग के नौ फूल अर्पित करें। कमल का फूल हो तो बेहतर है। इन फूलों को लाल रंग के वस्त्र में लपेटकर रखना चाहिए। इसके बाद माता को नौ तरह के खाद्य पदार्थ चढ़ाएं। अपने आसपास के लोगों में प्रसाद बांटे। साथ ही गरीबों को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर लें।

मंत्र: मां सिद्धिदात्री का पूजा करते समय इस आसान और कारगर मंत्र का जाप कर सकते हैं।
“ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः”

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