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जानिए, क्यों हनुमान को चिरंजीवी होने का वरदान देकर भगवान श्री राम ने ले ली जल समाधि

पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी।
हनुमान ने बह्मा से उनका कमंडल मांगा जिसमें पूरा बह्माण्ड आ सकता है। (photo source – Indian express)

प्रभु श्रीराम, विष्णु जी के 7वें मानव अवतार थे। और माता सीता उनकी धर्मपरायण पत्नी, जो माता लक्ष्मी का अवतार थीं। पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी। लेकिन क्या आपको भगवान श्री राम की जल समाधि की पूरी कहानी पता है? माना जाता है कि प्रभु राम ने जल समाधि लेने से पहले हनुमान जी को एक बड़ी जिम्मेदारी से अवगत कराया और चिरंजीवी होने का वरदान दिया। आइए जानते हैं कि कैसे प्रभु राम ने जल समाधि से पहले हनुमान को सौंपा एक अहम् कार्य-

प्रभु श्री राम ने अपनी एक विशेष मुद्रिका लाने का जिम्मा हनुमान को सौंपा। हनुमान मुद्रिका लेने के लिए गहरे सरोवर में उतरते हैं लेकिन उनके सामने मुद्रिकाओं का भंडार होता है। जिसमें से भगवान राम की विशेष मुद्रिका ढूंढना उन्हें असंभव लगा क्योंकि सभी मुद्रिकाओं में राम-सीता की ही तस्वीर थी। इस स्थिति में हनुमान ने मुद्रिकाओं के विशाल भंडार को ही साथ ले जाने की युक्ति तलाशी। हनुमान ने बह्मा से उनका कमंडल मांगा जिसमें पूरा बह्माण्ड आ सकता है। बह्मा ने उनकी योजना को जाना और अपना कमंडल हनुमान को दे दिया।

इसी कमंडल में हनुमान मुद्रिकाओं का भंडार लेकर राम के पास पहुंचे और उनसे उनकी वो विशेष मुद्रिका न ढूढ पाने की बात कही। तब राम ने बताया कि ये सभी मुद्रिका उन्ही की ही हैं जो हर कल्प (कल्प हिन्दू समय चक्र की बहुत लंबी मापन इकाई है। मानव वर्ष अनुसार 360 दिन का एक दिव्य अहोरात्र होता है। इसी हिसाब से दिव्य 12000 वर्ष का एक चतुर्युगी होता है। 71 चतुर्युगी का एक मन्वन्तर होता है और 14 मन्वन्तर/ 1000 चतुरयुगी का एक कल्प होता है। एक कल्प को बह्मा का एक दिन भी माना जाता है) में बह्मा के पास ये मुद्रिकाएं एकत्रित हो गई हैं। इन मुद्रिकाओं के बारे में समझाते हुए रामजी ने हनुमान को अपनी जल समाधि के बारे में समझाया।

इसी दौरान श्री राम ने हनुमान से कहा कि तुम भी हर जन्म में मेरे साथ ही रहे हो। लेकिन इस बार पृथ्वी पर तुम्हें और भी कर्तव्य निभाना है। साथ ही सीता से लव-कुश का ख्याल रखने का लिया वादा भी तुम्हें निभाना है। भगवान राम ने हनुमानजी को भक्त से भगवान बनने की बात कही। इसी दौरान राम ने हनुमान को जगत की सेवा के लिए चिरंजीवी होने का वरदान दिया। यह प्रकरण सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले  सीरियल ‘संकट मोचन महाबली हनुमान’ में दिखाया गया है।

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