Lathmar Holi 2026 Date: हिंदू धर्म में होली को केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आनंद, प्रेम और भक्ति का महापर्व माना जाता है। जहां देश के अधिकतर हिस्सों में होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को दिन मनाई जाती है, वहीं ब्रजमंडल में इस उत्सव की शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। यहां होली का रंग पूरे 40 दिनों तक भक्तिभाव और उल्लास के साथ बिखरा रहता है। ब्रज की होली अपनी अलग-अलग परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इनमें सबसे अनोखी और आकर्षक होली बरसाना और नंदगांव में खेली जाने वाली लट्ठमार होली मानी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष यह विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली कब मनाई जाएगी और इसके पीछे क्या धार्मिक महत्व है।
लट्ठमार होली 2026 कब है? (Lathmar Holi 2026 Date)
ब्रजमंडल में होली का उत्सव बसंत पंचमी से आरंभ हो जाता है, लेकिन इसकी असली उमंग और रंगत रंगभरनी एकादशी के बाद देखने को मिलती है। इसी दौरान ब्रज की गलियों में लड्डूमार होली से लेकर लट्ठमार होली तक के अनोखे रंग बिखरने लगते हैं। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर खेली जाने वाली लट्ठमार होली को देखने के लिए हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक ब्रजमंडल पहुंचते हैं। पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल नवमी तिथि सूर्योदय से प्रारंभ होकर 26 फरवरी 2026 को तड़के 02:40 बजे तक रहेगी। ऐसे में बरसाना में लट्ठमार होली 25 फरवरी 2026 को खेली जाएगी, जबकि अगले दिन नंदगांव में यह परंपरा 26 फरवरी 2026 को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाएगी।
लट्ठमार होली का धार्मिक महत्व (Lathmar Holi Significance)
ब्रज क्षेत्र में मनाई जाने वाली लट्ठमार होली एक बहुत ही खास और अनोखी परंपरा है। इस होली में नंदगांव के पुरुष और बरसाना की महिलाएं मिलकर भाग लेती हैं। होली के दिन महिलाएं पारंपरिक कपड़ों में घूंघट ओढ़कर पुरुषों पर प्रतीक के रूप में लट्ठ चलाती हैं, जबकि पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाते हैं। इस उत्सव में सिर्फ रंग और गुलाल ही नहीं होते, बल्कि चारों ओर भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों की आवाज़ और नाच-गाने से माहौल भक्तिमय हो जाता है। लट्ठमार होली का यह पर्व खुशी और मस्ती के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति को भी दर्शाता है।
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