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Lakshmi Panchami 2020: लक्ष्मी पंचमी पर माता लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न? जानिए पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र और आरती

Lakshmi Panchami 2020 (Lakshmi Ji Ki Aarti): इस दिन लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखकर विधि विधान उनकी पूजा करते हैं। इसे बसंत पंचमी भी कहा जाता है। माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की उपासना से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी पंचमी के दिन श्री सूक्त का पाठ करना भी काफी शुभ माना जाता है। इसलिए यदि संभव हो तो श्री सूक्त का पाठ भी अवश्य करें।

Lakshmi Panchami 2020, Laxmi Aarti, Puja Vidhi, Mantra, Katha: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को लक्ष्मी पंचमी (Laxmi Panchami) मनाई जाती है। नवरात्रि (Navratri) के पांचवें दिन ये त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखकर विधि विधान उनकी पूजा करते हैं। इसे बसंत पंचमी भी कहा जाता है। माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की उपासना से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जानिए देवी लक्ष्मी की पूजा विधि, व्रत कथा और मुहूर्त…

लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि (Laxmi Panchami Puja Vidhi):

– पंचमी के दिन सुबह स्नान कर व्रत करने का संकल्प लें।

– फिर पूजा घर में या घर के किसी भी पवित्र स्थान पर माता की प्रतिमा की स्थापना करें।

– श्री लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराएं। फिर चन्दन, ताल, पत्र, फूल माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल आदि चीजों का प्रयोग करते हुए माता की पूजा करें।

– मां लक्ष्मी को अनाज, हल्दी, गुड़ और अदरक मां को अर्पित करें।

– मां लक्ष्मी को कमल के फूल अर्पित करें। क्योंकि मां लक्ष्मी को कमल के फूल अत्याधिक प्रिय हैं।

– लक्ष्मी पंचमी के दिन श्री सूक्त का पाठ करना भी काफी शुभ माना जाता है। इसलिए यदि संभव हो तो श्री सूक्त का पाठ भी अवश्य करें।

– मां लक्ष्मी की आरती उतारने के बाद उन्हें खीर का भोग अवश्य लगाएं और उस खीर को प्रसाद के रूप में भी बाटें।

– इसके बाद व्रत करने वाले जातकों को ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान-दक्षिणा देनी चाहिए।

– इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। फल, दूध, मिठाई आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा (Lakshmi Panchami Vrat Katha):

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार मां लक्ष्मी देवताओं से रूठ गईं और श्री सागर में जा मिलीं। मां लक्ष्मी के चले जाने से देवता श्री विहीन हो गए तब देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को फिर से प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की व विशेष विधि विधान के साथ उपवास रखा। उनका अनुसरण करते हुए अन्य देवी देवताओं ने भी मां लक्ष्मी का उपवास रखा देवताओं की तरह असुरों ने भी मां लक्ष्मी की उपासना करनी प्रारंभ कर दी। जिसके बाद मां लक्ष्मी ने अपने भक्तों की पुकार सुनी और वे व्रत समाप्ति के पश्चात पुन: उत्पन्न हुई जिसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु से उनका विवाह हुआ और देवता फिर से श्री की कृपा पाकर धन्य हुए। यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। इसी कारण इस तिथि को लक्ष्मी पंचमी व्रत के रूप में मनाया जाने लगा। यह दिन इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि यह दिन नवरात्रि से भी पांचवां दिन माना जाता है।

लक्ष्मी जी के मंत्र (Laxmi Mantra):

महामंत्र : 1
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।

श्री लक्ष्मी मंत्र : 2
ॐ आं ह्रीं क्रौं श्री श्रिये नम: ममा लक्ष्मी
नाश्य-नाश्य मामृणोत्तीर्ण कुरु-कुरु
सम्पदं वर्धय-वर्धय स्वाहा:।

महामंत्र : 3
पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे
तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।।

महामंत्र : 4
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

महामंत्र : 5
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,
धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।

लक्ष्मी जी की आरती (Laxmi Ji Ki Aarti):

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
उमा ,रमा,ब्रम्हाणी, तुम जग की माता |
सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता |
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता |
कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
जिस घर तुम रहती हो , ताँहि में हैं सद् गुण आता |
सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता |
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरनिधि जाता |
रत्न चतुर्दश तुम बिन ,कोई नहीं पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
महालक्ष्मी जी की आरती ,जो कोई नर गाता |
उँर आंनद समाता,पाप उतर जाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
स्थिर चर जगत बचावै ,कर्म प्रेर ल्याता |
रामप्रताप मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….
ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

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