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Janmashtami ke bhajan: श्री कृष्ण के इन सुपरहिट भजनों के बिना अधूरा है कृष्ण जन्मोत्सव का सेलिब्रेशन

Krishna Janmashtami Songs: मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में हर साल भाद्र महीने की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर अगर आप भगवान कृष्ण के बेस्ट सॉन्ग ( Janmashtami song mp3 ) की तलाश कर रहे हैं तो हमारा ये आर्टिकल आपकी कुछ सहायता कर सकता है।

Author नई दिल्ली | Updated: August 23, 2019 1:47 PM
यहां देखिए भगवान कृष्ण के टॉप 10 भजन।

Krishna bhajan: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरु हो चुकी है। भारत में इस बार जन्माष्टमी 23 को है या 24 को इसे लेकर अभी कन्फ्यूजन बनी हुई है। उदया तिथि को मानने वाले 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने की बात कह रहे हैं। जबकि रोहिणी नक्षत्र जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, उसके आधार पर शुभ मुहूर्त 23 अगस्त को ही पड़ रहा है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में हर साल भाद्र महीने की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर अगर आप भगवान कृष्ण के बेस्ट सॉन्ग ( Janmashtami song mp3 ) की तलाश कर रहे हैं तो हमारा ये आर्टिकल आपकी कुछ सहायता कर सकता है। यहां जानिए जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के सबसे हिट 10 भजन…

1. यशोमती मैया से बोले नंदलाला… राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला

2. राधे राधे बरसाने वाली राधे…

3. अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम भजन…

4. श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम…

5. ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन…

6. रात भादौ की थी छाई काली घटा कृष्णा का जन्म लेना गजब हो गया…

7. हरे कृष्ण हरे कृष्ण , कृष्ण कृष्ण हरे हरे |

8. आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥

9. बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया, का करे यशोदा मैया… ढूंढे रे अखियां उसे चहुंओर जानें कहां छुप गया नंदकिशोर

10. अधरम मधुरम वदनम मधुरम मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्…

जन्‍माष्‍टमी तिथि और शुभ मुहूर्त: 23 अगस्‍त और 24 अगस्‍त।
अष्‍टमी तिथि आरंभ: 23 अगस्‍त 2019 को सुबह 08 बजकर 09 मिनट से।
अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 24 अगस्‍त 2019 को सुबह 08 बजकर 32 मिनट तक।
रोहिणी नक्षत्र आरंभ: 24 अगस्‍त 2019 की सुबह 03 बजकर 48 मिनट से।
रोहिणी नक्षत्र समाप्‍त: 25 अगस्‍त 2019 को सुबह 04 बजकर 17 मिनट तक।

व्रत का पारण: मान्यता अनुसार जन्‍माष्‍टमी के दिन व्रत रखने वालों को अष्‍टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के खत्‍म होने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। अगर दोनों का संयोग नहीं बन पा रहा है तो अष्‍टमी या फिर रोहिणी नक्षत्र उतरने के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।

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