Krishna Janmashtami 2026 Aarti Lyrics: आज देशभर में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। कई सालों के बाद ऐसा संयोग बन रहा जब कान्हा का जन्मोत्सव रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि को मनाया जा रहा है। आज मथुरा, वृंदावन और इस्कॉन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ जुट रही है। आज के दिन यानी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र को आधी रात यानी 12 बजे कान्हा का जन्म हुआ था। इसी के कारण हर साल इस तिथि को उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। आज के दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ चंद्रमा वृषभ राशि और सूर्य देव सिंह राशि में विराजमान है। आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा की विधिवत पूजा करने के साथ कृष्ण मंत्र, चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में आरती अवश्य करें। आइए जानते हैं श्री कृष्ण की संपूर्ण आरती…

Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर कान्हा का जन्म खीरा के बिना है अधूरा, जानिए शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और नाल छेदन विधि

श्री कृष्ण की आरती (Shri Krishna Aarti)

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Nand Ke Anand Bhayo Jai Kanhaiya Lal Ki Lyrics: नंद के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की…श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गाएं ये कृष्ण भजन

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।

Janmashtami 2026 Puja Timings Today: ये है मथुरा, वृंदावन, दिल्ली,नोएडा, गुरुग्राम सहित अन्य शहरों में कृष्ण जन्माष्टमी का सबसे उत्तम मुहूर्त, देखें पूरी लिस्ट

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद।।
टेर सुन दीन भिखारी की॥ श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

धर्म गाथा: श्रीकृष्ण जन्म की वो अलौकिक रात, जब बदल गया था प्रकृति का स्वरूप, पढ़ें क्या हुआ था उस दिव्य क्षण

डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।