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शांति का प्रतीक माना जाता है चावल, जानें क्यों किया जाता है पूजा सामग्री में इस्तेमाल

भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मुझे अर्पित किए बिना अन्न ग्रहण करने वाले को चोर मानना चाहिए।

चावल एक ऐसी सामाग्री है जो अधिकतर पूजा में इस्तेमाल की जाती है, इसे अक्षत भी कहा जाता है।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर शुभ मौके पर पूजा-पाठ किया जाता है और विधि-विधान के साथ पूजा के खास महत्व को समझा जाता है। हम चाहे किसी भी देव को अपना ईष्ट मानते हों लेकिन उनकी पूजा में बरती गई असावधानी के कारण पूजा का अर्थ व्यर्थ हो जाता है। हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का अस्तित्व माना जाता है। इन सभी की अराधना करने की विधि अलग हो सकती है लेकिन पूजा में प्रयोग होने वाली कुछ सामाग्री सामान ही होती हैं।

चावल एक ऐसी सामाग्री है जो अधिकतर पूजा में इस्तेमाल की जाती है, इसे अक्षत भी कहा जाता है। पूजा में प्रयोग होने वाले चावालों के लिए माना जाता है कि वो टूटे हुए नहीं होने चाहिए। इसके लिए मान्यता है कि चावल को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। सफेद होने के कारण इसे शांति से भी जोड़ा जाता है। यदि चावल टूटा हुआ हो तो उसे पूर्ण नहीं माना जाता है और पूजा शांति के साथ आगे बढ़े। जीवन में शांति भी बनी रहे। चावल को अन्न में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसे प्रभु को अर्पित करते हुए भी शांति की भावना मन में बनी रहनी चाहिए।

भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मुझे अर्पित किए बिना अन्न ग्रहण करने वाले को चोर मानना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को परलोक में चोरी के अपराध के लिए दंडित किया जाता है। इसी कारण से पूजा में अक्षत के रुप में चावल करके भगवान से प्रार्थना की जाती है कि हम जो भी अन्न-धन कमाते हैं वो सभी आपको अर्पित है। ऐसा करने से चोरी के अपराध से मुक्त हुआ जा सकता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार माना जाता है कि अन्न और हवन ये दोनों साधन हैं जिससे ईश्वर संतुष्ट होते हैं।

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