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जानिए, क्यों कहा जाता है जमीन पर बैठकर भोजन करना है सेहत के लिए फायदेमंद

सुखासन यानि पालथी मारकर जब हम भोजन करते हैं तो हमारा दिमाग बिलकुल शांत हो जाता है। साथ ही हम अपने भोजन पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं जिससे हमारा पेट नियंत्रण में रहता है।

Author February 8, 2019 5:44 PM
सांकेतिक तस्वीर।

आज के समय में नीचे यानि जमीन पर बैठकर भोजन करना आउटडेटेड और असभ्य माना जाता है। आमतौर पर जब कभी भी माता-पिता अपने बच्चों को नीचे बैठकर खाने के लिए कहते हैं तो वे अपनी नाक-भौंह सिकोड़ने लगते हैं। साथ ही मन में यह भी होता है कि यदि किसी ने नीचे बैठकर खाते हुए देख लिया तो वह उनके लिए शर्मिंदगी भरा होगा। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा कि पुराने जमाने में बड़े-बड़े ऋषि और महर्षि जमीन पर बैठकर ही भोजन क्यों करते थे? दरअसल वे न तो असभ्य थे और न ही निचले तबके से आते थे। फिर ऐसा क्यों था कि वे खाने के लिए नीचे ही क्यों बैठते थे? जानते हैं इसे।

भारत में जमीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। भाले ही आजकल लोग मेज पर बैठकर खाना खाते हैं लेकिन आज भी कई घरों में जहां लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं, वे जमीन पर बैठकर ही खाना खाते हैं। सुखासन यानि पालथी मारकर जब हम भोजन करते हैं तो हमारा दिमाग बिलकुल शांत हो जाता है। साथ ही हम अपने भोजन पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं जिससे हमारा पेट नियंत्रण में रहता है। सुखासन पाचन में मदद करने वाले मुद्रा है। जमीन पर बैठकर खाना खाने से शरीर का रक्त संचार ठीक रहता है और सभी अंगों तक खून पहुंचता है।

वहीं जब हम कुर्सी-टेबल पर बैठकर खाना खाते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन उल्टा हो जाता है। जो शरीर के लिए हानिकारक है। माना जाता है कि जो लोग जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना खाते हैं और बिना किसी सहारे जे खड़े होने में सक्षम हैं वे लंबे समय तक जीवित रहते हैं। भारत में एकसाथ बैठकर भोजन करने की प्रथा भी बहुत पहले से चली आ रही है। कहते हैं कि जमीन पर साथ बैठकर खाने से रिश्ते मजबूत होते हैं। साथ ही जब हम भोजन करने के लिए जमीन पर बैठते और उठते हैं तो अर्धपद्मासन की स्थिति बनती है। जो भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करता है। इस प्रकार जमीन पर बैठकर भोजन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है।

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