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कुंडली की मदद से कुछ ही मिनट में जानें कौन हैं आपके ईष्टदेव

हमें जीवन में किसी ना किसी की सहायता की जरूरत होती है और परेशानी में हमारे ईष्टदेवता ही हमारी मदद करते हैं, आसान तरीकों से पता लगाएं कौन हैं आपके ईष्टदेव...
तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है

जब जीवन में समस्याएं आने लगती हैं तो हर कोई किसी ना किसी की मदद लेता है। ये मदद भगवान, किसी व्यक्ति या आपके भाग्य की हो सकती है। कोई मुसिबत आने पर हम लोग ज्योतिष भी सलाह लेने लगते हैं। हम ज्योतिष की सलाह के बाद हम किसी देव को पूजना शुरू करते हैं फिर भी हमारी प्रार्थना काम में नहीं आती है। तब हमारे ईष्टदेव हमारी मदद करते हैं। अब सवाल आता है कि कैसे पहचानें कि हमारे ईष्टदेव कौन होंगे। ये हम ज्योतिष विद्या की मदद से पता लगा सकते हैं।

सबसे पहले समझ लेते हैं कि ईष्टदेव कौन होते हैं। ईष्टदेव के बारे में घर में बच्चों को उनके बड़े-बूढों से पता चलता है। जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है और परेशानियां उन्हें घेरने लगती हैं तो तब वो ईष्टदेव के बारे में जानकारी लेने का सोचते हैं। हम आपको बता दें कि ईष्ट का मतलब होता है जो आपको सबसे प्यारा हो, जो आपकी इच्छा के बिल्कुल अनुरूप हो, जिन बातों को हम सबसे अच्छा मानते हैं वो सभी बातें उसमें हो। वहीं देवता का अर्थ होता है जो दान करता है या देता है। बिना किसी तरह का शुल्क लिए आपकी जरूरत के अनुसार सब देता है। हर किसी के लिए अलग देवता होते हैं जिन्हें हम अपनी इच्छापूर्ति के लिए हम उनका पूजन करते हैं। हमारी जिस देवता से सर्वोत्तम इच्छापूर्ति हो उन्हें हम अपना ईष्ट देवता कहते हैं। जब जीवन में परेशानियां आने लगती हैं तो हमें अपने ईष्टदेव की जरूरत पड़ती है तो आइए जानते हैं कि ज्योतिष विद्या की सहायता से अपने ईष्टदेव को कैसे पहचाना जाए।

अपने ईष्टदेव को पहचानने के लिए आपको आपकी जन्म-कुंडली की आवश्यकता होगी। जन्म कुंडली को ध्यान से देखें उसमें जिस स्थान पर ग्रहों के अंश दिए गए होते हैं वहां किस ग्रह को सबसे अधिक अंश प्राप्त हैं। जिस ग्रह को सबसे अधिक अंश प्राप्त होंगे वो ग्रह आपकी कुंडली का आत्मकारक ग्रह कहलाता है। ये ग्रह ही आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यही ग्रह बताता है कि हमारे ईष्टदेव कौन-से हैं।

1. सूर्य- सूर्य आपके आत्म्कारक ग्रह हैं तो भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान राम आपके ईष्ट देवता होंगे।
2.चंद्रमा- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कृष्ण ईष्ट देव होंगे।
3.मंगल- मंगल आत्म्कारक ग्रह होने पर हनुमान, भगवान कार्तिकेय और नरसिंह भगवान आपके ईष्टदेवता होंगे।
4. बुध- भगवान गणेश और माता दुर्गा आपके ईष्ट देव होंगे।
5. बृहस्पति- भगवान विष्णु और उनके वामन अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे अगर बृहस्पति आपके आत्म्कारक ग्रह हैं।
6. शुक्र- माता लक्ष्मी और परशुराम अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे।
7.शनि- भैरव, यमराज, कुर्मावतार और हनुमान जी आपके ईष्ट देवता होंगे।
8.राहु- माता सरस्वती और शेषनाग आपके ईष्ट देवता होंगे।
9. केतु- भगवान गणेश और मत्स्य अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे।

ईश्वर एक हैं और उन्होंने हमारी सुविधा के लिए इतने सारे अवतार लिए हैं चाहे उनकी जिस रूप में पूजा करो, वो पूजा लगती उसी ईश्वर को लगती है। इसलिए ये बात हमेशा ध्यान रहनी चाहिए कि किसी के धर्म और रास्ते को गलत नहीं बताना चाहिए क्योंकि हर वस्तु, पेड़, पुस्तक और दुनिया के हर कण-कण में ईश्वर है। जिसकी जैसी इच्छा हो वो वैसे ईश्वर की अराधना कर सकता है।

     

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