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विष्णु पुराण: जानिए कौन-कौन से हैं भगवान विष्णु के दस अवतार

धार्मिक ग्रंथ भागवत गीता के मुताबिक भगवान विष्णु सतयुग से लेकर कलियुग तक सिर्फ एक अवतार नहीं बल्कि 24 अवतार लिए थे। इन चौबीस अवतारों में से जो प्रमुख दस अवतार हैं उन्हें दशावतार के रूप में जाना जाता हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: February 6, 2019 6:37 PM
भगवान विष्णु।

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु संसार के पालनहार माने गए हैं। धार्मिक ग्रंथ भागवत गीता के मुताबिक भगवान विष्णु सतयुग से लेकर कलियुग तक सिर्फ एक अवतार नहीं बल्कि 24 अवतार लिए थे। इन चौबीस अवतारों में से जो प्रमुख दस अवतार हैं उन्हें दशावतार के रूप में जाना जाता हैं। श्रीमद्भागवद् गीता के अनुसार जब कभी भी धर्म की हानि होने लगेगी और अधर्म बढ़ेगा तब-तब भगवान का अवतार होगा। विष्णु देव एक ऐसे भगवान माने जाते हैं जिन्होंने मानव की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए समय-समय पर अवतार लिया। जानते हैं कि भगवान विष्णु के दस अवतार कौन-कौन से हैं।

मत्स्य अवतार: इसने भगवान विष्णु मछ्ली के रूप में अवतार लिया। यह भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है। इस अवतार के बारे में मान्यता है कि जब एक राक्षस ने वेदों को चुराकर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था। तब भगवान विष्णु ने एक मछली का रूप धारण कर वेदों को पाया और उसे फिर से स्थापित किया।

वराह अवतार: ऐसा कहा जाता है कि वराह अवतार हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार भगवान विष्णु का तीसरा अवतार है। इस अवतार में भगवान विष्णु ने असुर का रूप धरण कर लिया था और हिरण्यकश्यप राक्षस का वध किया था।

कच्छप अवतार: कूर्म अवतार को ही कच्छप अवतार के रूप में जाना जाता है। इस अवतार में भगवान विष्णु ने एक कछुआ बनकर धरती पर अवतार लिया था। यह भगवान विष्णु का वह अवतार है जिसमें श्रीहरि ने समुद्र मंथन के समय मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर रखा था। समुद्र मंथन में भगवान विष्णु मंदार पर्वत और वसुकी नाग की मदद से देवताओं और राक्षसों ने 14 रत्न पाए थे।

नृसिंह अवतार: यह भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चौथा अवतार है। ऐसा माना जाता है कि इस अवतार में नरसिंह यानि आधे शेर और आधे मनुष्य बनकर प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि इस अवतार में भगवान विष्णु का चेहरा शेर का था और उनका शरीर इंसान का था। इस अवतार से नृसिंह ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी। साथ ही प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप का वध किया था।

वामन अवतार: भगवान विष्णु का पांचवां अवतार वामन अवतार माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु ने ब्राह्मण बालक का रूप धारण कर पृथ्वी पर आए और राजा बलि से दान में तीन पग पृथ्वी मांग ली थी। कहते हैं कि इसी तीन कदम में वामन ने पूरी धरती नाप ली थी। साथ ही राजा बलि का घमंड तोड़ दिया था।

परशुराम अवतार: यह भगवान विष्णु का छठा अवतार है। अपने इस अवतार में भगवान विष्णु ने राजा प्रसेनजीत की बेटी रेणुका और जमदग्नि के पुत्र थे। जमदग्नि के पुत्र होने की वजह से इन्हें जमदग्न्य भी कहते हैं। ये भगवान शिव के परम भक्त थे। शिव ने इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर परशु शस्त्र दिया था। इनका नाम राम था और परशु लेने के कारण इनका नाम परशुराम कहलाया। कहा जाता है कि इन्होंने क्षत्रिय का कई बार विनाश किया था।

श्री राम अवतार: यह भगवान विष्णु के दस अवतारों में से एक है। जहां एक ओर महर्षि वाल्मीकि ने राम की कथा रामायण में लिखी थी। वहीं दूसरी ओर तुलसीदास ने भक्ति काव्य में रामचरितमानस की रचना की थी। श्रीराम अयोध्या के राजा दशरथ और कौशल्या के पुत्र थे।

श्रीकृष्ण अवतार: भगवान श्रीकृष्ण भी विष्णु के ही अवतार थे। भागवत ग्रन्थों में श्रीकृष्ण की लीला की कथा का वर्णन मिलता है। श्रीकृष्ण मथुरा में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण की बहुत बड़ी भूमिका थी। कहते हैं कि कृष्ण जी इस युद्ध में कृष्ण के सारथी बने थे।

बुद्ध अवतार: यह भगवान विष्णु का नौवां अवतार था। बुद्ध को लोग गौतम बुद्ध और महात्मा बुद्ध भी कहते हैं। भगवान बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की रचना की थी। आज यह संसार के चार बड़े धर्मों में से एक है।

कल्कि अवतार: यह भगवान विष्णु का दसवां अवतार है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कलियुग के अंत में होगा। जिसके बाद धरती से सभी पापों बुरे कर्मों का नाश हो जाएगा।

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