ताज़ा खबर
 

चंद्र ग्रहण 2019: जानिए ग्रहण के कारण मंदिरों की पूजा-अर्चना के समय में क्या बदलाव आए

उत्तराखंड में 16 जुलाई की शाम में 4:25 से केदारनाथ, बद्रीनाथ और समिति के दूसरे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इनके अलावा यमुनोत्री, गंगोत्री धाम के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन शुद्धिकरण के बाद ही इन मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाएगी।

chandra grahan, lunar eclipse, chandra grahan time, sutak time, chandra grahan date, which temple is closed during lunar eclipse,उत्तराखंड में 16 जुलाई की शाम में 4:25 से केदारनाथ, बद्रीनाथ और समिति के दूसरे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

Chandra grahan or Lunar eclipse: बीते कल यानि 16 जुलाई को इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगा और गुरू पूर्णिमा का पर्व भी मनाया गया। चंद्र ग्रहण का समय रात को 1:30 बजे से 4:30 बजे तक रहा। सूतक चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले मतलब कि शाम को 4:30 बजे से लग गया था। सूतक के दौरान कोई भी कार्य करना जैसे कि भोजन ग्रहण करना, सिलाई का कार्य करना आदि की अनुमति नहीं होती। यहां तक कि पूजा-पाठ करना भी शुभ नहीं माना जाता है। इसी कारण से सूतक के समय सभी मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। इसी कारण से आज के दिन अनेकों प्रमुख मंदिरों के पूजा व आरती के समय पर प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण भक्तों को दर्शन करने में समस्या हो सकती है। यहां आप जानेंगे कि किन मंदिरों में ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा और उनमें आरती और पूजा का समय क्या होगा…

– मथुरा के प्रसिद्ध मंदिर द्वारकाधीश में चंद्र ग्रहण के दौरान भी दर्शन किए जा सकेंगे। मंगला ग्वाल श्रृंगार के दर्शन सुबह के निर्धारित समय अनुसार ही होंगे। सुबह 10 बजे से 10:30 बजे तक राज भोग के दर्शन किए जाएंगे। दोपहर 2:30 से 2:40 तक उद्यापन के दर्शन होंगे, भोग और संध्या आरती दोपहर में 3:15 से 3:25 तक एक साथ की जाएंगी और इसके साथ ही शाम को 4 से 4:30 तक शयन के दर्शन होंगे।

– उत्तराखंड में 16 जुलाई की शाम में 4:25 से केदारनाथ, बद्रीनाथ और समिति के दूसरे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इनके अलावा यमुनोत्री, गंगोत्री धाम के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन शुद्धिकरण के बाद ही इन मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाएगी।

– सांदीपनि आश्रम में दोपहर बाद दर्शनार्थियों के प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे और अगले दिन 17 जुलाई को गुरूश्रेष्ठ सांदीपनि का पंचामृत से अभिषेक करने के बाद ही पूजा-अर्चना की जाएगी।

– उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में ग्रहण के कारण 17 जुलाई को श्रावण मास की पहली भस्मारती सुबह शुद्धि के बाद 5 बजे यानि कि अपने समय से 2 घंटे देरी से की जाएगी। बता दें कि मंदिर के कपाट श्रावण में 3 बजे खोल दिए जाते हैं जिसके बाद भस्मारती की जाती है। लेकिन चंद्र ग्रहण 4:30 बजे तक है इसलिए इस कारण से मंदिर के कपाट कुछ देरी से खोले जाएंगे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चंद्रग्रहण पर बिहार में कब से कब तक रहेगा सूतक काल, जानिए मौसम की भविष्यवाणी
2 गुरु पूर्णिमा पर 149 साल बाद बना ऐसा संयोग, 16 और 17 जुलाई को रहेगा चंद्रग्रहण का साया
3 गंगा तटों पर त्योहार की तरह मनाया गया चंद्रग्रहण