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Papmochani Ekadashi 2020: पापमोचिनी एकादशी कब? मान्यता है इस दिन व्रत रखने से पाप हो जाते हैं ख़त्म

Papmochani Ekadashi: ऐसा कहा जाता है कि पापमोचनी एकादशी व्रत करने से व्रती के समस्त प्रकार के पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं

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Papmochani Ekadashi: हिंदू कैलेंडर के हिसाब से हर साल 24 एकादशियां होती हैं। चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पाप मोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। सभी एकादशियों में से इस व्रत का सबसे ज्यादा महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी पूरे भक्ति भाव से व्रत-पूजा करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसके फल और प्रभाव के बारे में अर्जुन को बताया था। इस व्रत का फल प्राप्त करने के लिए भक्तों को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मनुष्य के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं इस दिन से जुड़ी खास बातें और इस साल कब मनाई जाएगी ये एकादशी

कब है ये एकादशी: इस साल यह एकादशी 19 मार्च को पड़ रहा है।पापमोचिनी एकादशी हर वर्ष चैत्र मास में मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल की एकादशी तिथि को ही पापमोचनी एकादशी तिथि के नाम से जाना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार, पापमोचनी एकादशी के व्रत से धन-धान्य में फायदा और हर तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। जिस तरह कठिन तपस्या करके फल की प्राप्ति होती है, ठीक वैसे ही पुण्य पापमोचनी व्रत करने से भी मिलता है। इस बार शुभ मुहुर्त की कुल अवधि 2 घंटे 25 मिनट की रहेगी। पारण मुहुर्त का समय जहां 20 मार्च को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 7 मिनट तक है, वहीं 20 मार्च को साढ़े 12 बजे तक हरिवास समाप्त होने का समय है।

क्या है पूजा विधि: इस दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। व्रतियों को दशमी तिथि को एक बार सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। इस दिन हर तरह के मोह-माया से दूर रहकर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए। उसके बाद श्री विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूरा दिन व्रत रखते हुए शाम के समय फिर से नारायण का पूजन करके उन्हें भोग लगाना चाहिए और ब्राह्मणों को भोजन कराकर ही खुद भोजन करना चाहिए। व्रत के दिन ‘ओम विष्णवे नम:’ का जाप करना फायदेमंद साबित होता है। इस दिन विष्णुसहस्रनाम का भी पाठ करने से भी विशेष लाभ होता है।

इन बातों का रखें ख्याल: ऐसी मान्यता है कि जो भी पूरे मन से एकादशी व्रत को रखता है, उन्हें हमेशा सदाचार का पालन करना चाहिए। पुराणों के अनुसार, इस दिन लोग जितना त्याग करते हैं भगवान विषणु उन्हें उतनी अधिक संपन्नता प्रदान करते हैं। इस दिन व्रतियों और दूसरे लोगों को भी खाने में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही साथ, बैंगन, मांस-मदिरा, पान-सुपारी से भी परहेज करना चाहिए। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए। साथ ही, प्रभु नारायण का स्मरण कर जागरण करना चाहिए।

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