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जानिए, गणेश चतुर्थी के दिन चांद को नहीं देखने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता

ब्रह्मा जी के कहने पर भगवान शिव ने वह फल कार्तिकेय को दे दिया। इस बात से गणेश ही नाराज हो गए और सृष्टि रचना के काम में शिव को बाधा पहुंचाने लगे।

Author नई दिल्ली | June 27, 2019 10:49 AM
भगवान गणेश।

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है। कहते हैं कि इस दिन गणेश जी की विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यता यह भी है कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद को नहीं देखना चाहिए। इस बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चांद को देखने से झूठे आरोप लगते हैं। दरअसल शास्त्रीय मानताओं के मुताबिक भाद्रपद की गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने से कलंक लगता है। इसलिए इस गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि यह ऐसा क्यों है? साथ ही साथ इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा क्या है? यदि नहीं, तो आगे जानते हैं इसे।

पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया था। कहते हैं कि एक बार ब्रह्मा जी कैलाश पर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे। उसी वक्त महर्षि नारद ने एक बहुत ही स्वादिष्ट फल भगवान शिव को अर्पित किया। उस समय गणेश और कार्तिकेय वहीं मौजूद थे और उन्होंने शिव से वह फल मांगी। तब ब्रह्मा जी ने महादेव से कहा- “हे महादेव आप इस फल को कार्तिकेय को दे दें।”

ब्रह्मा जी के कहने पर भगवान शिव ने वह फल कार्तिकेय को दे दिया। इस बात से गणेश ही नाराज हो गए और सृष्टि रचना के काम में शिव को बाधा पहुंचाने लगे। ऐसे में ब्रह्मा जी गणेश के उग्र रूप को देखकर भयभीत हो गए। वहीं दूसरी तरफ इस घटना को देखकर चंद्र देव हंसने लगे। चंद्रमा को हंसता देख गणेश जी गुस्से में आ गए और उन्हें श्राप देते हुआ कहा कि- “तुम देखने लायक नहीं रहोगे और जो कोई भी तुम्हें देखेगा वह पाप का भागी होगा।” कहते हैं कि जिस दिन गणपति ने चंद्र देव को श्राप दिया था उस दिन गणेश चतुर्थी थी। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद को नहीं देखना चाहिए।

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