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जानें बृहस्पतिवार के व्रत का महत्व और इसकी पूजन विधि

How to do Thursday fast: व्रत रखने के इच्छुक भक्तों को लगातार 7 गुरुवार तक व्रत रखना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। हो सके तो पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनें। उसके बाद सूर्य और तुलसी को जल चढ़ाएं।

Author नई दिल्ली | July 3, 2019 2:17 PM
बृहस्पतिवार व्रत कथा और पूजन विधि।

Thursday Fast Pooja Vidhi: मनोकामना पूर्ति के लिए गुरुवार का व्रत करना फलदायी माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का दिन है। कुछ लोग इस दिन देव गुरु बृहस्पति की भी पूजा करते हैं। माना जाता है कि बृहस्पतिवार के व्रत करने से सुख-समृद्धि आती है और जो लोग संतान सुख से वंचित है उनके लिए भी यह व्रत फलदायी साबित होता है। विवाह जल्दी करने के लिए, आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए और बुद्धि और शक्ति प्राप्त करने के लिए इस व्रत को करने की मान्यता है। जानें कैसे रखा जाता है यह व्रत और किन बातों का रखना होता है ध्यान…

व्रत की पूजा विधि: व्रत रखने के इच्छुक भक्तों को लगातार 7  गुरुवार तक व्रत रखना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। हो सके तो पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनें। उसके बाद सूर्य और तुलसी को जल चढ़ाएं। इसके उपरान्त विष्णु भगवान की विधि विधान से पूजा करें। ध्यान रहे कि पूजा में पीली वस्तुओं का इस्तेमाल करें। जैसे पीले फल, फूल और भगवान को चढ़ाने के लिए पीले वस्त्र इत्यादि। इसके बाद केले के पेड़ पर चने की दाल के साथ पूजा की जाती है। और उसे हल्दी युक्त जल चढ़ाया जाता है। फिर केले के पेड़ पर घी का दीपक जलाकर आरती करें। अपनी सुविधानुसार घर या केले के पेड़ के सामने बैठकर व्रत कथा का पाठ करें।

ऐसे रखें व्रत: इस व्रत में पूरे दिन भूखे रहकर दिन में एक बार सूर्य ढलने के बाद भोजन किया जा सकता है। भोजन में पीली वस्तुएं ग्रहण करना अच्छा रहता है। लेकिन इस व्रत में भूलकर भी नमक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। और ना ही इस दिन नमक की खरीदारी करें। प्रसाद के रूप में केला का प्रयोग करना ज्यादा शुभ माना जाता है। भगवान को भोग लगाकर उन केलों का दान कर दें। लेकिन ध्या रखें कि व्रत रखने वालों को इस दिन केला नहीं खाना चाहिए। पूजा के बाद बृहस्पति देव की कथा जरूर सुने। क्योंकि बिना व्रत कथा के व्रत पूरा नहीं माना जाता और उससे मिलने वाला फल सही से प्राप्त नहीं हो पाता है।

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