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Chhath Puja 2017: छठ पर्व पर जानिए नरेंद्र मोदी के विचार, बताया था अपने आप में एक संस्कार

Chhath Puja 2017: छठ पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तक चलता है।

Chhath Puja 2017 Geet, Songs: छठ पर्व सूर्यदेव की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

छठ पर्व की तैयारियां शुरू हो चुकी है। इस साल देशभर में 26 अक्टूबर (गुरुवार) को छठ पर्व मनाया जाएगा। छठ पर्व सूर्यदेव की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि छठ सूर्यदेव की बहन है। इसीलिए छठ के दिन छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव की पूजा की जाती है।

2014 में जब पीएम मोदी बिहार दौरे पर गए। जहां उन्होंने छठ पर्व के बारे में बहुत सी बातें कही। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने छठ पर्व के बारे में क्या कहा –

1.  हम सभी उगते सूरज के पुजारी हैं लेकिन बिहारी समाज ऐसा है जो सूरज के हर रूप की पूजा करता है। ढलते सूरज की पूजा करना एक अनोखे संस्कार के बैगर संभव नहीं होता है। उगते सूरज की पूजा तो सब करते हैं लेकिन सूरज के हर रुप की पूजा करना और छठ की पूजा करना अपने आप में अद्भुत है।

2. छठ पूजा व्यक्तिगत श्रद्धा, भक्ति और उमंग का तो पर्व है लेकिन हमारे पूर्वजों ने छठ पूजा के साथ महत्वपूर्ण चीज जोड़ी है, जिसके लिए मुझे बड़ा गर्व होता है- कितना ही पान खाने का शौक हो लेकिन छठ पूजा के दिन कोई कही गंदगी नहीं करता है। इतना सफाई का आग्रह रहता है कि चारो तरफ स्वच्छता का माहौल होता है और ये अपने आप में बहुत बड़े सस्ंकार हैं।

3. ये देश विविधताओं से भरा हुआ है और हमें उन विविधताओं का आदर सम्मान करना चाहिए। इस समाज को तोड़ने वाली शक्तियां बहुत है लेकिन जोड़ने वाली बहुत कम है। इसके लिए हमे एकता के सूत्र में मिलकर काम करना होगा।

बिहारी और गुजराती के बीच में दीवार क्यों?
बिहारी और गुजराती के बीच दीवार नहीं होनी चाहिए। आप भी भारत माता के बेटे हैं और हम भी भारत माता के बेटे हैं। क्या मां के दूध में दरार हो सकती है और हम इसी मां के दूध को पीकर बड़े हुए है, जिसमे दरार नहीं हो सकती है।गुजरात में बिहार के लोग बहुत रहते हैं। जो सूर्य के हर रूप की पूजा करने के आदि हैं। वो सूर्य पुत्री तापी के पास ज्यादा रहते हैं। इसीलिए आपका और हमारा नाता बड़ा अटूट है।

छठ पर्व का महत्व

हिन्दू धर्म में छठ पर्व का बहुत महत्व है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तक चलता है। पहले दिन यानि चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। दूसरे दिन यानि पंचमी को खरना व्रत किया जाता है। इस दिन शाम के समय व्रत करने वाले खीर और गुड़ के अलावा फल का सेवन करते हैं। इसके बाद अगले 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि खरना पूजन से छठ देवी प्रसन्न होती है और घर में वास करतीं हैं। इसके बाद षष्ठी को किसी नदी या जलाशय के में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन होता है।

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