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सरसों, बादाम और तिल के तेल के ऐसे इस्तेमाल से ढेरों लाभ होने की है मान्यता

शनि की साढ़ेसाती से बचने के लिए भी सरसों का तेल को कारगर बताया गया है। इसके लिए हर रोज संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाना चाहिए।

सांकेतिक तस्वीर।

सरसों, बादाम और तिल के तेल का हम अपने दैनिक जीवन में अलग-अलग ढंग से इस्तेमाल करते हैं। इन सभी तेलों की अपनी उपयोगिता है। लेकिन आज हम आपको सरसों, बादाम और तिल के तेल के कुछ ज्योतिषीय प्रयोग बताने जा रहे हैं। इन प्रयोगों से अलग-अलग तरह के ढेरों लाभ होने की मान्यता है। शनिदेव को प्रसन्न करने और उनका आर्शीवाद पाने के लिए सरसों के तेल का प्रयोग किया जाता है। कहते हैं कि सरसों का तेल शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से बचाता है। इससे व्यक्ति के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। माना जाता है कि शनिवार के दिन सरसों के तेल से शरीर की मालिश करने से भी शरीर के कष्ट दूर होते हैं। हालांकि ऐसे लोगों को सरसों के तेल से शरीर की मालिश करने के लिए मना किया गया है जिनकी कुंडली में मंगल ग्रह उच्च राशि का हो।

शनि की साढ़ेसाती से बचने के लिए भी सरसों का तेल को कारगर बताया गया है। इसके लिए हर रोज संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाना चाहिए। इसके अलावा कुंडली में वृहस्पति की दशा को मजबूत करने के लिए भी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सरसों के तेल में ही सब्जी बनाकर खाने के लिए कहा गया है। शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना भी काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे जीवन में बेरोजगारी की समस्या के दूर होने की मान्यता है।

ज्योतिष की मानें तो बादाम के तेल के सही इस्तेमाल से कुंडली में बुध ग्रह की दशा को मजबूत किया जा सकता है। मालूम हो कि बुध के कमजोर होने से चर्मरोग होने की बात कही गई है। इसके लिए बादाम के तेल से शरीर की मालिश करने के लिए कहा जाता है। हर दिन तिल के तेज का दीया जलाने के लिए कहा जाता है। मान्यता है कि इससे बंद किस्मत के दरवाजे खुलते हैं। इसके अलावा खाने में सूरजमुखी के तेल का इस्तेमाल भी काफी लाभकारी माना गया है। इससे व्यक्ति को प्रकृति से लाभ मिलने की बात कही गई है।

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