हिन्दू धर्म में शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं और ग्रहों के बीच उनका बहुत महत्व है। साथ ही शनि देव को कर्मफलदाता और दंडाधिकारी माना जाता है। माता जाता है शनि व्यक्ति को कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यहां हम शनि देव के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है। कोकिलावन शनि मंदिर एक अत्यंत प्रसिद्ध और आस्था से जुड़ा धार्मिक स्थल है। यह मंदिर ब्रज क्षेत्र के पवित्र स्थलों में गिना जाता है।
मान्यता है कि यहां शनि देव खुद विराजमान हैं और सच्चे मन से आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। यह स्थान विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान होते हैं, क्योंकि यहां दर्शन और पूजा करने से इन ग्रह दोषों के प्रभाव को कम करने की मान्यता है। आज हम जानते हैं दिव्य धाम सीरीज में कोकिलावन शनि धाम की महिमा और महत्व के बारे में…
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शनि देव को भगवान कृष्ण ने दिए दर्शन
पौराणिक कथा के अनुसार, शनिदेव अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने की इच्छा लेकर नंदगांव पहुंचे। लेकिन उस समय नंद बाबा ने उन्हें दर्शन करने से रोक दिया। कारण यह था कि शनिदेव की वक्र दृष्टि से सभी डरे रहते थे, और वे बालक कृष्ण को किसी भी प्रकार की अनिष्ट दृष्टि से बचाना चाहते थे। इस अस्वीकार से शनिदेव काफी दुखी हो गए और वे निराश होकर लौटने लगे। तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य लीला से शनिदेव को संदेश दिया कि वे नंदगांव के पास स्थित एक वन में जाकर उनकी तपस्या करें। भगवान ने आश्वासन दिया कि वे वहीं उन्हें दर्शन देंगे। शनिदेव ने भगवान की आज्ञा मानकर उस वन में कठोर तपस्या शुरू कर दी।
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वहीं कई सालों की तपस्या के बाद भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हुए और उन्होंने शनिदेव को कोयल के रूप में दर्शन दिए। यही कारण है कि उस स्थान का नाम कोकिलावन पड़ा, अर्थात वह वन जहां भगवान ने कोयल रूप में प्रकट होकर शनिदेव को दर्शन दिए। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव को आदेश दिया कि वे इसी स्थान पर निवास करें और भक्तों के कष्टों का निवारण करें। तभी से यह स्थान “कोकिलावन शनि धाम” के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
कोकिलावन मंदिर की पूजा पद्धति भी काफी विशेष है। खासकर शनिवार के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द और काला वस्त्र अर्पित करते हैं।
ऐसे पहुंच सकते हैं कोकिलावन मंदिर
यदि यहां पहुंचने की बात करें तो यह स्थान सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 120 से 130 किलोमीटर के बीच है और सड़क मार्ग से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। मथुरा तक पहुंचने के बाद यहां से लगभग 30 से 35 किलोमीटर की दूरी तय करके मंदिर पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या ऑटो लेकर मंदिर जाया जा सकता है। यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो इंदिरा गाधी एयरपोर्ट दिल्ली सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मथुरा और फिर कोकिलावन पहुंचा जा सकता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
