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जानिए माता पार्वती और देवी लक्ष्मी के बारे में कहानियां

एक कथा के अनुसार देवी लक्ष्मी और माता पार्वती दोनों बहनें थी।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (Source: Dreamstime)

देवी लक्ष्मी और माता पार्वती के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं। पुराणों में दोनों के बारें में अलग-अलग कहानियां वर्णित हैं। एक कथा के अनुसार देवी लक्ष्मी और माता पार्वती दोनों बहनें थी। देवी लक्ष्मी के बारें में जो कहानी सबसे प्रचलित है वो है देवताओं का असुरों के साथ समुद्र-मंथन करना। पुराणों में दर्ज एक कथा के अनुसार देवराज इंद्र ने दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्त होने के लिए असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस समुद्र-मंथन के बाद 14 रत्न मिले थे, जिसमें लक्ष्मी का प्रकट होना भी था।

वहीं एक दूसरी कहानी के मुताबिक देवी लक्ष्मी सप्तर्षियों में एक महर्षि भृगु की बेटी थीं। पार्वती के पिता दक्ष और भृगु भाई थे। इस प्रकार लक्ष्मी भी पार्वती की बहन हुईं। कथा के अनुसार भगवान विष्णु को पाने के लिए देवी लक्ष्मी की तपस्या की थी। माता पार्वती शिवजी से प्रेम करती थी और पति के रुप में उन्हें पाना चाहता थी। ठीक उसी तरह देवी लक्ष्मी भी भगवान विष्णु को पसंद करती थी और पति के रूप में उन्हें पाना चाहती थी। देवी लक्ष्मी ने अपनी यह इच्छा पूरी करने के लिए समुद्र तट पर घोर तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान विष्णु को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

विष्णु पुराण में लिखी गई एक कहानी के अनुसार एक बार इंद्र कहीं भ्रमण के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में उन्हें ऋषि दुर्वासा मिल गए। इंद्र देव ने ऋषि दुर्वासा का मान रखने के लिए उन्हें प्रणाम किया। आर्शिवाद में ऋषि ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए भगवान विष्णु का दिव्य पारिजात का पुष्प दिया। इद्र ने इस फूल को अपने वाहन ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया। फूल के रखने से ऐरावत भी भगवान विष्णु के समान तेजस्वी हो गया और पुष्प को कुचलते हुए वहां से चला दिया।

इसे दुर्वासा ने अपना अपमान माना और इंद्र देव को श्राप दे दिया कि वो लक्ष्मी-हीन हो जाएगा। श्राप के बाद लक्ष्मी इंद्रलोक से चली गईं। इसके बाद असुरों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया। स्वर्ग के कई नेता भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे, जहां देवी लक्ष्मी उनके साथ विराजमान थी।

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