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जानिए, क्या है तिरुपति बालाजी मंदिर का रहस्य

इस मंदिर में एक दिया कई सालों से जल रहा है। इसके बारे में किसी को नहीं मालूम है कि इसे कब जलाया गया था।

Venkateswara Temple, Sri Venkateswara Swamy Vaari Temple, Tirumala, Tirumala, Tirupati, Interesting Facts of Tirupati Balaji Temple, Tirupati Balaji, Andhra Pradesh, Balaji Temple, religion newsतिरुपति बालाजी।

तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। तिरुमला वेंकटेश्वर यानि तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्रप्रदेश के तिरुमला पहाड़ों में है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। समुद्र तल से तीन हजार दो सौ फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुलमा की पहाड़ियों पर बना श्री वेंकटेश्वर मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है। कई शताब्दी पहले बना यह मंदिर दाक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। कहते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर जितना अद्भुत है उतना ही रहस्यों से भरा है। तो जानते हैं तिरुपति बालाजी मंदिर का रहस्य।

क्या आपको पता है कि इस मंदिर में विराजमान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल उनके असली बाल हैं? ऐसा कहा जाता है कि ये बाल कभी नहीं उलझते और हमेशा मुलायम रहते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां पर खुद भगवान विराजते हैं। वेंकटेश्वर स्वामी यानि बालाजी की मूर्ति का पिछला हिस्सा हमेशा नम रहता है। यदि ध्यान से कान लगाकर सुनें तो आप हैरान रह जाएंगे। क्योंकि जब आप कान लगाएंगे तो आपको समुद्र की आवाजें सुनाई देगी। कहते हैं कि इसी कारण से हमेशा बालाजी की मूर्ति नम रहती है। इसके अलावा भगवान बालाजी की ठोढ़ी में चंदन लगाने की परंपरा है। इसका संबंध इस मंदिर की दाईं ओर रखीछड़ी से है।

कहते हैं बचपन में इस छड़ी का प्रयोग भगवान को मारने के लिए किया जाता था। लेकिन एक बार इस छड़ी से उनकी ठोढ़ी में चोट लग गई। उनका यह चोट चंदन के लेप से ही सभी हुआ। यही कारण है कि उनकी ठोढ़ी में चंदन का अभिषेक किया जाता है। इतना ही जब आप बालाजी की मूर्ति को गर्भगृह से देखेंगे तो भगवान की मूर्ति गर्भगृह के अंदर पाएंगे। लेकिन जब आप इसे बाहर आकर देखेंगे तो पाएंगे कि मूर्ति मंदिर की दाईं ओर स्थित है। गुरुवार के दिन स्वामी की मूर्ति को सफेद चंदन से रंग दिया जाता है। जब इस लेप को हटाया जाता है तो मूर्ति पर माता लक्ष्मी के चिह्न बने रह जाते हैं। इस मंदिर में एक दिया कई सालों से जल रहा है। इसके बारे में किसी को नहीं मालूम है कि इसे कब जलाया गया था।

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