know importance of malmas 2018 in hindi - आज से शुरू हुआ मलमास, नहीं करने चाहिए ये कार्य - Jansatta
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आज से शुरू हुआ मलमास, नहीं करने चाहिए ये कार्य

ये महीना आध्यात्मिक महीना है, इस महीने में भौतिक जीवन से संबंधित काम करने की मनाही है। जैसे- विवाह, कर्णवेध, चूड़ाकरण आदि मांगलिक काम वर्जित है, गृह निर्माण और गृह प्रवेश भी इस माह वर्जित है।

अधिक मास को पहले बहुत अशुभ माना जाता था।

हिंदू पंचांग में 12 मास होते हैं, ये सूर्य की संक्रांति और चंद्रमा पर आधारित होते हैं। हर साल सूर्य और चंद्र मास में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, तीन साल में ये अंतर लगभग एक माह का हो जाता है। इसलिए हर तीसरे साल अधिक मास आ जाता है, इस बार ज्येष्ठ में अधिक मास रहेगा, ये 16 मई से 13 जून तक रहेगा। अधिक मास को पहले बहुत अशुभ माना जाता था। बाद में श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया। तब से अधिक मास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया। इस मास में विष्णु जी के सारे गुण पाए जाते हैं। इसलिए इस मास में धार्मिक कार्यों के उत्तम परिणाम मिलते हैं।

क्या करें और क्या न करें –  ये महीना आध्यात्मिक महीना है, इस महीने में भौतिक जीवन से संबंधित काम करने की मनाही है। जैसे- विवाह, कर्णवेध, चूड़ाकरण आदि मांगलिक काम वर्जित है, गृह निर्माण और गृह प्रवेश भी इस माह वर्जित है। लेकिन इस माह जो काम पहले से निश्चित हैं, वो काम किए जा सकते हैं। रोज श्री हरि, अपने गुरु या ईष्ट की आराधाना करें, जहां तक संभव हो आहार, विचार और व्यवहार सात्विक रखें। पूरे महीने में गीता का पाठ करें, निर्धनों की सहायता करें, अन्न, वस्त्र और जल का दान करें। इस महीन में पूर्वजों और पितरों के लिए किए गए काम भी लाभदायी होते हैं। कामनाओं के लिए इस महीने किए गए प्रयोग सफल होते हैं।

इस तरह पाएं ईश्वर की कृपा – पूरे महीने सुबह-शाम कृष्ण जी की उपासना करें, शाम को उनके सामने दीपक जरुर जलाएं, रोज भगवान की कथा सुनें। निर्धनों को जल और ऋतुफल का दान करें, महीने के अंत में तीस की संख्या में मिठाई का दान करें।

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