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बुधवार को पीपल की जड़ में नहीं चढ़ाया जाता जल, इन 11 नियमों को अपनाने से पूजा हो सकती है सफल

माता लक्ष्मी को विशेष रुप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है।

घर के मंदिर में सुबह-शाम दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए।

जीवन को सुखमय बनाने के लिए देवी-देवताओं के पूजन की परंपरा किया जाता है। माना जाता है कि पूजन से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी के साथ पूजा करने के लिए विशेष नियमों का पालन किया जाता है। जिनका पालन करने से व्यक्ति की इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन समृद्धि से भरपूर रहते हैं।

– सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु पंचदेव कहलाते हैं। इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रुप से की जाती है। हर दिन पूजा के समय इन पंचदेवों का ध्यान किया जाना चाहिए। इससे ही पूजा सफल होते है और व्यक्ति से सभी काम बनते हैं।
– मान्यताओं के आधार पर कहा जाता है कि भगवान शिव, गणेश और भैरव को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
– मां दुर्गा को दूर्वा( एक प्रकार की घास) नहीं चढ़ानी चाहिए। ये विशेश रुप से गणेश जी को अर्पित की जाती है।
– सूर्य देव के पूजन में शंख के जल से अर्घ्य देना चाहिए।
– तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए हुए नहीं तोड़ना चाहिए, ऐसे पत्तों से कोई लाभ नहीं होता है और भगवान भी इसे स्वीकार नहीं करते हैं।
– माना जाता है कि बिना स्नान किए या अपवित्र अवस्था में शंख बजाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और उस स्थान को छोड़कर चली जाती हैं।
– माता लक्ष्मी को विशेष रुप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है। इस फूल को जल से साफ करके पांच दिनों तक चढ़ाया जा सकता है।

– तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इन्हें जल छिड़ककर पुनः भगवान को अर्पित किया जा सकता है।
– बुधवार और रविवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल डालकर पूजन नहीं किया जा सकता है।
– घर के मंदिर में सुबह-शाम दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए।
– रविवार, एकादशी, द्वादशी, सक्रांति और संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

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