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जानें, कितने तरह के होते हैं रुद्राक्ष, हर एक का होता है अपना देवता और जपमंत्र

बताया गया है कि रुद्राक्ष 14 तरह के होते हैं। पहला होता है एक मुखी रुद्राक्ष। इस रुद्राक्ष को शिव के सबसे करीब माना जाता है।

Rudraksh, Rudraksh of shiv, Rudraksh benefit, Rudraksh value, Rudraksh advantages , Rudraksh god, रुद्राक्ष, type of Rudrakshरुद्राक्ष की माला।

जून के महीने को सावन का महीना कहा जाता है। इस समय रुद्राक्ष पहनना अच्छा बताया जाता है। हर रुद्राक्ष का अपना विशेष महत्व होता है। रुद्राक्ष कई तरह का होता है। आज हम लाएं हैं आपके लिए खास रुद्राक्ष जिन्हें मंत्रों और देवता के अनुसार पहनना चाहिए। पंडित शशि मोहन बहल की किताब रत्न रंग और रुद्राक्ष के अनुसार रुद्राक्ष को देवता और मंत्र का जाप करके ही पहनना चाहिए। अगर आप बताई गई बातों को ध्यान में रखकर रुद्राक्ष पहनते हैं तो आपको विशेष लाभ होता है। कहा जाता है कि कई सालों की तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव ने जब अपनी आंखे खोली तो उनकी आंखों में से आंसू धरती पर गिरे। जिसके बाद वहां एक रुद्राक्ष का पेड़ बन गया।

बताया गया है कि रुद्राक्ष 14 तरह के होते हैं। पहला होता है एक मुखी रुद्राक्ष। इस रुद्राक्ष को शिव के सबसे करीब माना जाता है। जिन लोगों को धन-दौलत और भौतिक चीजों की चाह होती हो वो इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं। किताब के अनुसार इस रुद्राक्ष को धारण करने से पहले ऊँ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

दो मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर देवता का रुद्राक्ष कहा जाता है। इसकी खास बात होती है कि ये हर इच्छआ पूरी करता है। इसको धारण करने से पहले ॐ नम: मंत्र का जाप करना चहिए।

तीन मुखी रुद्राक्ष- इसे अग्नि देवता का रुद्राक्ष कहा जाता है। इसका धारण करने से व्यक्ति की हर इच्छा जल्दी पूरी होती है। इसे पहनते समय ऊँ क्लीं नम: का जाप करना चाहिए।

चार मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को साक्षात ब्रह्मा का रुद्राक्ष कहा जाता है। इसका पहनने से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे धारण करते समय ऊँ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

पांच मुखी रुद्राक्ष- इसे कालाग्नि देवता का रुद्रक्षा कहा जाता है। इस पहनने से लोग अपनी हर परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं। मंत्र पहनने से पहले ऊँ ह्रीं नम: का जाप करना चाहिए।

छ: मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को कार्तिकेय का रुद्राक्ष कहा जाता है। इसे पहनने से ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिलती है। इसे धारण करने से पहले ॐ ह्रीं हुम नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

सात मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को सप्तर्षि सप्तमातृकाएं का रुद्राक्ष कहा जाता है। जिन लोगों को अत्याधिक धन की हानि हुई है और उनके पास इससे उबरने का कोई तरीका नहीं है, उन्हें इस रुद्राक्ष को पहनना चाहिए। इसे धारण करने से पहले ऊँ हुं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

आठ मुखी रुद्राक्ष- यह रुद्राक्ष पहनने से लोग रोग मुक्त रहते हैं। इस रुद्राक्ष के लिए मंत्र है ॐ हुम नम:।

नौ मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को नौ देवियों का स्वरूप कहा जाता है। समाज में प्रतिष्ठा की चाह रखने वाले लोगों को नौ मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए। इसके लिए ऊँ हीं हुम् नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।

दस मुखी रुद्राक्ष- इसे विष्णु का स्वरुप माना जाता है। खुशियां पाने के लिए इस रुद्राक्ष को पहनना चाहिए। इसके लिए ॐ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को रुद्रदेव का स्वरूप माना जाता है। हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए इसे पहनना चाहिए। इसके लिए ॐ ह्रीं हुम नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

बारह मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को सबसे अलग माना जाता है वजह है इसका बालों में पहना जाना। इसे धारण करने का मंत्र है ऊँ क्रौं क्षौं रौं नम:।

तेरह मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को पहनने वाले लोगों का सौभाग्य चमकने लगता है। इसे धारण करने से पहले ॐ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

चौदह मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष को पापों से मुक्ति दिलाने वाला कहा जाता है। इसका जाप है ॐ नम:

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