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जानें क्यों पवित्र माना जाता है गंगाजल, शास्त्रों में बताए गए हैं ये महत्व

महाभारत ग्रंथ के अनुसार माना जाता है कि महाभारत का पूरी कहानी गंगामाता से ही शुरु होती है।

गंगा के पवित्र जल के लिए मान्यता है कि ये कभी भी सड़ता नहीं है।

हिंदू धर्म में गंगा जल को पवित्र माना जाता है, इसके साथ ही गंगा को पूजनीय माना गया है। हिंदू धर्म के साथ पूरी दुनिया में गंगा की पवित्रता प्रख्यात है। इसके जल को अमृत माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भागीरथ मां गंगा को धरती पर लेकर आए थे। माना जाता है कि भागीरथ जी गंगा को जिस रास्ते से गंगा की धारा को हिमायल से लेकर आए थे उस मार्ग पर कई दिव्य औषधियां और वनस्पतियां पाई जाती हैं। इन्हीं कारणों से माता गंगा को पवित्र माना जाता है। ऋग्वेद और अन्य कई वेदों में मां गंगा की व्याख्या की गई है। गंगोत्री, ऋषिकेष. हरिद्वार, बनारस आदि स्थान धार्मिक दृष्टि से गंगा की पवित्रता के कारण ही प्रख्यात माने जाते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता गंगा स्वर्ग में रहती थीं, स्वर्ग से धरती पर उनके आने के लिए विशेष प्रयोजन किया गया था। मान्यता अनुसार राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मृत्यु का श्राप मिला था और वो अग्नि में जल रहे थे। उन्हें कष्टों से मुक्ति गंगा जल से ही मिल सकती थी। सगर के वंशज के कठोर तप के कारण माता गंगा धरती पर आईं। मां गंगा अपनी इसी महिमा के कारण भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। महाभारत ग्रंथ के अनुसार माना जाता है कि महाभारत का पूरी कहानी गंगामाता से ही शुरु होती है। इसके साथ ही गंगा तट पर बैठकर ही महर्षि वाल्मिकी ने महाग्रंथ रामायण की रचना की थी। माना जाता है कि गंगा के पवित्र जल से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। हिंदू धर्म में गंगा जल का प्रयोग सभी प्रकार की पूजा में भी किया जाता है।

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गंगा के पवित्र जल के लिए मान्यता है कि ये कभी भी सड़ता नहीं है। इसके साथ ना ही इसमें दुर्गंध आती है इसी कारण से घरों में लोग गंगा जल रखते हैं और उसका प्रयोग अन्य गतियों में करते हैं। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार माना जाता है कि मृत्यु के समय यदि किसी को गंगा जल पिलाया जाए तो उस व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। मंदिरों में गंगाजल चरणामृत की तरह प्रयोग किया जाता है। गंगा जल को ब्रह्मदेव का माना जाता है। माना जाता है किसी को चाहे स्कीन की कितनी भी समस्या हो वो गंगा में स्नान करने से ठीक हो जाती हैं।

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