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Shimla: यहां हनुमान जी लेते हैं अपने भक्तों का ‘टेस्ट’, टाइमिंग से तय होती है ‘फिटनेस’

बोर्ड पर लिखी जानकारी के मुताबिक, मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को चार ऐज कैटिगिरी में बांटा गया है। पहली कैटिगरी 30 साल से कम उम्र वालों की है। दूसरी कैटिगरी 30 से 50 साल तक उम्र वालों के लिए रखी गई है।

Author शिमला | June 18, 2019 5:17 PM
Shimla: यहां हनुमान जी लेते हैं अपने भक्तों का ‘फिटनेस टेस्ट’

बात हनुमान जी की हो तो मन में भक्तिभाव जागने लगता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के शिमला में जाखू पर्वत पर मौजूद 108 फीट के हनुमान जी अपने भक्तों का ‘फिटनेस टेस्ट’ लेते हैं। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। दरअसल, शिमला के रिज ग्राउंड से जाखू पर्वत वाले हनुमान मंदिर तक एक रास्ता जाता है। वहां एक बोर्ड लगा है, जिसमें मंदिर तक पहुंचने की टाइमिंग दी गई है। इसी टाइमिंग से किसी भी शख्स की फिटनेस पता लगती है। बता दें कि यह मंदिर रिज ग्राउंड से करीब 1500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

यह है फिटनेस का फंडा: शिमला के जाखू पर्वत पर हनुमान जी का काफी फेमस मंदिर मौजूद है, जिसे मंकी टैंपल भी कहा जाता है। इसका रास्ता रिज ग्राउंड से होकर गुजरता है, जहां एक बोर्ड लगा हुआ है। दरअसल, यह बोर्ड लोगों को उनकी फिटनेस के बारे में जानकारी देता है। इस बोर्ड के मुताबिक, जाखू मंदिर तक पैदल जाकर हर कोई अपनी फिटनेस चेक रहा सकता है। इस बोर्ड पर अलग-अलग ऐज कैटिगरी के हिसाब से टाइमिंग दी गई है।

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उम्र और टाइमिंग का यह है हिसाब-किताब: बोर्ड पर लिखी जानकारी के मुताबिक, मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को चार ऐज कैटिगिरी में बांटा गया है। पहली कैटिगरी 30 साल से कम उम्र वालों की है। दूसरी कैटिगरी 30 से 50 साल तक उम्र वालों के लिए रखी गई है तो तीसरी कैटिगरी में 50 से 70 साल तक के लोग आते हैं। इसके बाद चौथी कैटिगरी 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए है।

शिमला के रिज ग्राउंड से हनुमान मंदिर जाने वाले रास्ते पर लगा यह है बोर्ड। फोटो सोर्स: कुमार सम्भव जैन

30 साल से कम उम्र वालों के लिए यह है पैमाना: जिन लोगों की उम्र 30 साल से कम है, अगर वे 30 मिनट में रिज ग्राउंड से मंदिर तक पहुंच जाते हैं तो उन्हें एकदम फिट माना जाता है। यह दूरी तय करने में 30 से 45 मिनट लगते हैं तो व्यक्ति को फिट श्रेणी में रखा जाता है। 45 से 60 मिनट तक खर्च करने वालों को अपनी सेहत में सुधार करने की जरूरत है तो एक घंटे से ज्यादा टाइम लगाने वाले अनफिट माने जाते हैं।

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30 से 50 साल वाले ऐसे साबित हो सकते हैं फिट: 30 से 50 साल उम्र वाले व्यक्ति अगर जाखू मंदिर तक 45 मिनट में पहुंच जाते हैं तो उन्हें एकदम फिट करार दिया जाता है। वहीं, 60 मिनट में यह दूरी तय करने वाले फिट माने जाते हैं। अगर किसी को 60 मिनट से ज्यादा वक्त लगता है तो उसे अपनी सेहत में सुधार करने की जरूरत मानी जाती है।

50 से 70 साल वालों के लिए यह पैमाना: शिमला के स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर 50 से 70 साल तक के व्यक्ति 55 मिनट में यह दूरी तय करते हैं तो वे एकदम फिट हैं। 70 मिनट में मंदिर पहुंचने वालों को फिट और इससे ज्यादा वक्त लगाने वालों को अनफिट करार दिया जाता है। अगर किसी व्यक्ति की उम्र 70 साल से ज्यादा है और वह आसानी से मंदिर तक पहुंच भी जाता है तो उसे पूरी तरह फिट माना जाता है। 70 से ज्यादा उम्र वालों के लिए समय की सीमा नहीं रखी गई है।

शिमला के जाखू पर्वत पर स्थित हनुमान जी की यह प्रतिमा 108 फुट ऊंची है। फोटो सोर्स: कुमार सम्भव जैन

जाखू मंदिर की है काफी मान्यता: स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती है। किवदंतियां हैं कि त्रेतायुग में राम-रावण के युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तो उनके लिए संजीवनी बूटी लेने हनुमान जी इसी रास्ते से गए थे। कहा जाता है कि उस वक्त इस पर्वत पर यक्ष ऋषि का आश्रम था, जिनसे संजीवनी बूटी की पहचान जानने के लिए हनुमान जी रुके थे। लोग बताते हैं कि जिस जगह हनुमान जी उतरे थे, वहां उनके पद चिन्हों को संगमरमर में बनवाकर रखा गया है। वहीं, यक्ष ऋषि के नाम पर ही यह मंदिर यक्ष से याक, याक से याकू और याकू से जाखू कहा जाने लगा।

यक्ष ऋषि ने ही बनवाया था मंदिर: कहा जाता है कि हनुमान जी ने यक्ष ऋषि को वचन दिया था कि संजीवनी बूटी लेने के बाद लौटते वक्त भी वह यहां रुकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में ऋषि परेशान हुए तो भगवान ने उन्हें दर्शन दिए, जिसके बाद इस स्थान पर हनुमान जी की मूर्ति भी प्रकट हुई। इसके बाद यक्ष ऋषि ने इस मंदिर की स्थापना की, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। कहा जाता है कि अगर आप शिमला गए हैं तो जाखू मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए।

बच्चन परिवार से भी जुड़ा है नाता: जाखू मंदिर के बारे में कई मान्यताएं हैं, लेकिन इसका संबंध बच्चन परिवार से भी जुड़ा हुआ है। वहीं, मंदिर में स्थापित 108 फुट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के वक्त एक्टर अभिषेक बच्चन खुद मौजूद थे। दरअसल, इस प्रतिमा का निर्माण अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता नंदा के ससुर एचसी नंदा ने 2010 में कराया था। उस वक्त हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार धूमल ने प्रतिमा का अनावरण किया था। नंदा परिवार दिल्ली में रहता है और शिमला में भी उनका फार्महाउस है।

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