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Athi Varadar: 40 साल बाद फिर निकाली गई विष्णु के अवतार की प्रतिमा, दर्शन के लिए रोज हो रही लाखों की भीड़

चेन्नई से करीब 72 किलोमीटर दूर कांचीपुरम में इस उत्सव के लिए कई साल से मंदिर बनाया जा रहा था। बता दें कि यह फेस्टिवल 48 दिन तक मनाया जाता है। यह त्योहार 1 जुलाई को शुरू हुआ और 17 अगस्त तक चलेगा।

अत्तिवरदर त्योहार के लिए कांचीपुरम में कई साल से मंदिर बनाया जा रहा था। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

तमिलनाडु के कांचीवरम में रोजाना लाखों लोग जुट रहे हैं। बताया जा रहा है कि यहां अत्तिवरदर त्योहार मनाया जा रहा है, जिसका आयोजक 40 साल में महज एक बार ही होता है। वहीं, यह त्योहार महज 48 दिन ही मनाया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस त्योहार में भगवान विष्णु के अवतार अत्तिवरदर अवतार की प्रतिमा 40 साल बाद पानी से निकाली जाती है और त्योहार के बाद इस प्रतिमा को दोबारा पानी में रख दिया जाता है। 48 दिवसीय यह त्योहार 1 जुलाई को शुरू हुआ था और 17 अगस्त तक चलेगा।

4 लोगों की मौत के बाद सुर्खियों में आया त्योहार: गौरतलब है कि तमिलनाडु का यह त्योहार उस वक्त सुर्खियों में आया, जब गुरुवार (8 अगस्त) को भगदड़ में 4 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन दर्शन की टाइमिंग में कटौती करने की प्लानिंग कर रहा है। बताया जा रहा है कि दर्शन के लिए लाइन में लगे श्रद्धालु अचानक बेकाबू हो गए और धक्का-मुक्की होने लगी।

अत्तिवरदर त्योहार के दौरान कांचीपुरम में इतनी ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

रोजाना एक लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान: अत्तिवरदर त्योहार के लिए देश भर के कोने-कोने से लाखों लोगों के कांचीपुरम पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए हैं। माना जा रहा है कि कांचीपुरम रोजाना एक लाख श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं झेल सकता है। जिला कलेक्टर पी पोन्नैह ने बताया, ‘‘शहर में रोजाना 30 से 50 हजार श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, लेकिन यह संख्या रोजाना दोगुनी हो रही है।’’

राष्ट्रपति कोविंद भी कर चुके दर्शन: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित अत्तिवरदर त्योहार में शामिल हो चुके हैं। वहीं, डीएमके नेता स्टालिन की पत्नी दुर्गा स्टालिन और करुणानिधि की पत्नी व कनिमोझी की मां रजति अम्माल भी भगवान विष्णु के अवतार अत्तिवरदर के दर्शन कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इन शख्सियतों ने भी आम लोगों की तरह कतार में लगकर ही भगवान के दर्शन किए।

विवाद में भी फंस चुका है यह त्योहार: गौरतलब है कि अत्तिवरदर त्योहार के दौरान विवाद भी हो चुका है। बता दें कि मदुरई के एक डॉन वरिचियूर सेल्वम और उसके गिरोह के सदस्यों को अत्तिवरदर की पीठ के पास बैठने की अनुमति दी गई, जिससे राज्य में हंगामा हुआ था। आरोप है कि उन्हें इलाके के स्थानीय नेताओं से एक ने वीवीआईपी पास दिया था।

अंजीर की लकड़ी से बनाई जाती है प्रतिमा: जानकारों के मुताबिक, अत्तिवरदर की प्रतिमा 9 फीट ऊंची होती है। इसे अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनाया जाता है। यह प्रतिमा 40 साल में एक बार कांचीपुरम वर्धराज पेरुमल मंदिर में अनंतसरास (मंदिर के वॉटर टैंक) से निकाली जाती है।

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