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चाणक्य नीति: जानिए आखिर चाणक्य ने क्यों कहा बुरे बनो तभी होगे सफल

आगे चाणक्य कहते हैं कि यदि इंसान को यह लगे कि यह काम करने से उसे खुशी मिलेगी, लेकिन सामने वाला उस काम को करने से माना कर रहा है और जबरन करवा रहा है। ऐसे में यदि उसमें आनंद नहीं आ रहा है तो वह काम नहीं करना चाहिए।

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बचपन से हमलोग सुनते आए हैं कि हमें अच्छा बनाना चाहिए और सब की अच्छाई करनी चाहिए। क्योंकि अच्छे इंसान की हर जगह कद्र होती है। परंतु चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि बुरे बनो तभी सफल होगे और खुशियां भी मिलेगी। चाणक्य बताते हैं कि गुड़ की तरह मीठे और सरल रहने वाले व्यक्ति को दुनिया वाले निगल जाते हैं। साथ ही तरह-तरह की यातनाएं भी देते हैं। लेकिन क्या जानते हैं कि आखिर चाणक्य ने ऐसा क्यों कहा? अगर नहीं तो आगे हम इसे चाणक्य नीति के अनुसार जानते हैं।

चाणक्य नीति नामक पुस्तक में आचार्य चाणक्य ने लिखा है कि मनुष्य को बुरा बनना चाहिए। क्योंकि जंगल में भी सीधे खड़े हुए पेड़ को सबसे पहले काटा जाता है। इसलिए आवश्यकता से अधिक सीधे और सरल बनना इंसान के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। आगे चाणक्य बताते हैं कि जिंदगी में ऐसी कई परिस्थितियां आती हैं जहां व्यक्ति को बुरा बनना पड़ता है। जैसे अगर कोई दबाना चाहे तो ऐसे में दबकर जिंदगी नहीं जीनी चाहिए। क्योंकि हर इंसान को अपनी जिंदगी खुलकर जीने का पूरा हक है। चाणक्य बताते हैं कि जो भी इंसान इस धरती पर जन्म लिया है उसे सत्तर से अस्सी साल जिंदगी जीने के लिए मिली है। ऐसे में हर मनुष्य को इस जीवन-काल को खुलकर जीना चाहिए न कि किसी के दबाव में आकर।

चाणक्य नीति में चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति चाहे किसी रिलेशन में हो या फ्रेंडशिप में, यदि रिश्ते में भी सामने वाला इंसान दबाने की कोशिश कर रहा हो तो दबना नहीं चाहिए। क्योंकि मनुष्य को अपनी जिंदगी को अपने ढंग से जीने का पूरा-पूरा अधिकार है। आगे चाणक्य कहते हैं कि यदि इंसान को यह लगे कि यह काम करने से उसे खुशी मिलेगी, लेकिन सामने वाला उस काम को करने से माना कर रहा है और जबरन करवा रहा है। ऐसे में यदि उसमें आनंद नहीं आ रहा है तो वह काम नहीं करना चाहिए।

चाणक्य कहते हैं कि यदि इंसान को यह डर लगा रहता है कि उसने सामने वाले को किसी काम के लिए माना कर दिया तो उसे बुरा लग जाएगा या फिर वह इंसान उसे छोड़कर चला जाएगा तो उसे जाने दें। क्योंकि ऐसे लोगों से दूरियां बनाना ही बेहतर है। दरअसल ऐसी सोच वाला व्यक्ति हमेशा दुख ही पहुंचता है। साथ ही जिंदगी की आजादी को भी छीन लेता है। चाणक्य नीति में आचार्य बताते हैं कि इंसान इस दुनियां में खुश रहने और जिंदगी मदद से जीने के लिए आया है। इसलिए किसी के इशारे पर कठपुतली की तरह नाचने की आवश्यकता नहीं है।

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