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Happy Basant Panchami: …तो इसलिए बसंत पंचमी त्योहार पर पहने जाते हैं पीले वस्त्र

Happy Basant Panchami 2018: मां सरस्तवती की पूजा-अर्चना के वक्त लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। पूजन के दौरान पीले रंग के चावल, पीले लड्डू और केसर की खीर का उपयोग करते हैं। इस दिन हर तरफ पीला रंग दिखाई देता है।

Kite Flying, Basant Panchami 2018: पीला रंग मां सरस्वती का प्रतीक माना जाता है।

Basant Panchami 2018: आज (22 जनवरी 2018) को देशभर में बसंत पंचमी का त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था। इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। लोग इस पूजन पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं। पीला रंग मां सरस्वती का प्रतीक माना जाता है। पीले रंग के कपड़े पहनने के साथ-साथ पूजा के लिए पीले रंग के चावल, पीले लड्डू और केसर वाली खीर का इस्तेमाल किया जाता है।

बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से जाना जाता है। भारत में ज्ञान पचंमी का त्योहार कई साल से उल्हास के साथ मनाया जा रहा है। पूरे साल को 6 ऋतूओं में बांटा गया है, इनमें वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतु शामिल है। इनमें वसंत को सभी ऋतुओं का राजा भी माना जाता है।

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का महत्व: पीला रंग हिंदुओं में शुभ रंग माना जाता है। वहीं पीला रंग माता सरस्वती का प्रिय रंग माना जाता है। साथ ही पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। इसलिए मां सरस्तवती की पूजा-अर्चना के वक्त लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। यहां तक कि पूजन के दौरान पीले रंग के चावल, पीले लड्डू और केसर की खीर का उपयोग करते हैं। इस दिन हर तरफ पीला रंग दिखाई देता है। वसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। मां सरस्वती की आराधना का यह पर्व मंद-शीतल वायु के प्रवाह, प्रकृति की पीली चुनरी के साथ नए उत्साह के संचार का संदेश लाता है। वहीं लोग एक-दूसरे के माथे पर चंदन या हल्दी का तिलक लगाकर पूजा शुरू करते हैं।

बसंत पंचमी 2018 सरस्वती पूजा विधि और शुभ मुहूर्त: जानें सरस्वती पूजा के मंत्र, आरती और शुभ समय

पूजा विधि के दौरान दाएं हाथ की तीसरी उंगली में हल्दी, चंदन व रोली के मिश्रण को माता सरस्वती के चरणों और माथे पर लगाया जाता है और जलार्पण किया जाता है। धान और फलों को मां सरस्वती की मूर्ति के सामने रखा जाता है। घर की महिलाएं बेर, संगरी और लड्डू इत्यादि बांटती है। साथ ही वसंत पंचमी के दिन पतंगबाजी का आयोजन होता है। हालांकि कहा जाता है कि पतंगबाजी से का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज हजारों साल पहले चीन में शुरू हुआ था। फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुंचा था।

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