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घर में ‘शालिग्राम’ रखने से वास्तु और पितृ दोष खत्म होने की है मान्यता, जानिए इसे रखने की सही विधि

विष्णु पुराण के अनुसार यदि शालिग्राम गोल है तो वह विष्णु का गोपाल रूप हुआ। वहीं यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो वह विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है।

लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम।

शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। जिस प्रकार कई लोग घर में जलधरी शिवलिंग रखते हैं उसी प्रकार कई घरों में शालिग्राम रखने का भी प्रचलन है। मान्यता है कि शिवलिंग की तरह ही शालिग्राम रखने के भी कई लाभ हैं। शास्त्रों में शालिग्राम के 33 प्रकार बताए गए हैं। इनमें से 24 प्रकार प्रकार ऐसे हैं को भगवान विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित हैं। कहते हैं कि ये सभी 24 शालिग्राम साल की 24 एकादशी व्रत से से संबंध रखते हैं। आगे जानते हैं कि लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम रखने से किस प्रकार घर का वस्तु दोष खत्म होता है और इसे रखने की सही विधि क्या है?

विष्णु पुराण के अनुसार यदि शालिग्राम गोल है तो वह विष्णु का गोपाल रूप हुआ। वहीं यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो वह विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि शालिग्राम पर उभरी हुईं रेखाएं और चक्र विष्णु के अन्य अभी अवतारों को दर्शाता है। लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम को अत्यधिक दुर्लभ और प्रभावशाली माना गया है। इस शालिग्राम में भगवान विष्णु के चक्र की आकृति बनी होती है। मान्यता है कि इस शालिग्राम को घर में रखने से वस्तु दोष और पितृ दोष खत्म हो जाता है। साथ ही इस शालिग्राम की नित्य पूजा-अर्चना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। परंतु लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम को घर में किस प्रकार रखा जाए यह खास महत्व रखता है। शास्त्रों के अनुसार इसे घर में इस प्रकार रखना चाहिए-

  • घर में सिर्फ एक ही लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम की पूजा करना चाहिए।
  • लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम की पूजा विष्णु की मूर्ति से कहीं अधिक लाभकारी माना गया है।
  • घर में लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखना चाहिए।
  • घर में रखे लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम को रोज पंचामृत से स्नान कराना चाहिए।
  • जिस घर में लक्ष्मी-नारायण का पूजन होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।
  • लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम पूजन करने से सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • लक्ष्मी-नारायण शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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