आज दिव्यधाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं केदारनाथ मंदिर के बारे में, केदारनाथ मंदिर का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। साथ ही केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पवित्र धाम है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के चार धामों और पंच केदारों का हिस्सा है। मान्यता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ धाम की यात्रा करता है वह जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत के बाद पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए यहां भोलेनाथ की तपस्या की थी। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि इस मंदिर का पुनर्निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा कराया गया था।

वहीं केदारनाथ मंदिर कमेटी के अनुसार, चार धाम यात्रा का आरंभ 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही हो जाएगा। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे।

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पंच केदार में शामिल है केदारनाथ मंदिर

धार्मिक दृष्टि से केदारनाथ धाम को मोक्षदायक तीर्थ माना जाता है। यहां दर्शन करने से जीवन के पापों से मुक्ति और शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। वहीं यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, जिसकी आकृति अनोखी और त्रिकोणीय है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान शिव हर मनोकामना पूरी करते हैं।

कैसे पहुंचे केदारनाथ मंदिर

केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए लोग हवाई, रेल और सड़क मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। वहीं यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुंड तक पहुंचा जा सकता है। साथ ही जो यात्री रेल से आना चाहते हैं तो उनके लिए हरिद्वार रेलवे स्टेशन और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन आना होगा। इसके बाद बस या टैक्सी के माध्यम से गौरीकुंड तक पहुंचा जाता है। वहीं गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16 से 18 किलोमीटर का कठिन लेकिन आध्यात्मिक ट्रेक करना होता है, जिसे श्रद्धालु पैदल, घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से भी पूरा कर सकते हैं। वहीं यात्रा से पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।

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