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करवा चौथ 2017: जानिए इस वर्ष किस दिन है करवाचौथ का व्रत और क्या है इस त्योहार का महत्व

Karwa Chauth 2017 Date: सुहागन महिलाएं अपने पति की उम्र लंबी की प्रार्थना करती हैं और उनका गृहस्थ जीवन सुखध रहे इसके लिए व्रत करती हैं।

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करवा चौथ 2017: हिंदू धर्म में त्योहारों की मान्यता बहुत अधिक है। हर माह में कोई पर्व आ जाता है और गणेश चतुर्थी के पश्चात त्योहारों के मौसम की शुरुआत हो जाती है। इसी तरह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाने वाला उपवास सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक होता है। इस दिन करवाचौथ का व्रत किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की उम्र लंबी की प्रार्थना करती हैं और उनका गृहस्थ जीवन सुखध रहे इसके लिए व्रत करती हैं। पूरे भारतवर्ष में हिन्‍दू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूमधाम से करवाचौथ मनाते हैं। हालांकि उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि में इस रात की रौनक अलग ही होती है। करवाचौथ व्रत के दिन एक और जहां दिन में कथाओं का दौर चलता है तो दूसरी और दिन ढलते ही विवाहिताओं की नजरें चांद के दिदार के लिये बेताब हो जाती हैं। चांद देखने के बाद ही महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखती हैं, जिनकी सगाई हो गई हो और शादी में समय हो।

अपने सुहाग की रक्षा के लिए उपवास रखने के बाद आसमान के चमकते चांद का दिदार कर अपने पति के हाथों से निवाला खाकर अपना उपवास खोलती हैं। करवाचौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले ही 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है और करवाचौथ व्रत की कथा सुनी जाती है। सामान्यत: विवाह के बाद 12 या 16 साल तक लगातार इस उपवास को किया जाता है लेकिन इच्छानुसार जीवनभर भी विवाहिताएं इस व्रत को रख सकती हैं। माना जाता है कि अपने पति की लंबी उम्र के लिये इससे श्रेष्ठ कोई उपवास अथवा व्रत आदि नहीं है। इस दिन महिलाएं श्रृंगार करके पूजा करने जाती हैं और फिर आकर घर के बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं। महिलाओं में ये त्योहार बहुत ही प्रचलित होता है।

इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 8 अक्टूबर को है। इस दिन रविवार का दिन है। ये व्रत कार्तिक माह की व्यापिनी चतुर्थी को महिलाओं द्वारा रखा जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा में पुरुष रुपी ब्रह्मा की उपासना की जाती है और इससे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। चतुर्थी तिथि का आरंभ 8 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 58 मिनट को होगा और चतुर्थी तिथि की समाप्ति 9 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 16 मिनट को होगी।

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