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Kartik Purnima 2020 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra: कार्तिक पूर्णिमा पर इस विधि से तुलसी पूजा करने से धन प्राप्ति की है मान्यता, जानें विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त

Kartik Purnima 2020 Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri, Mantra: देवी तुलसी और भगवान श्री हरि की उपासना करने का बहुत अधिक महत्व बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की उपासना श्रीहरि स्वीकार जरूर करते हैं।

kartik purnima, kartik purnima 2020, kartik purnima puja vidhiKartik Purnima 2020 Puja Vidhi: कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवी तुलसी की आराधना की जाती हैं।

Kartik Purnima 2020 Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri, Mantra: कार्तिक पूर्णिमा इस साल 30 नवंबर, सोमवार यानी आज मनाई जा रही है। शास्त्रों में इस दिन को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। कहते हैं कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन देवी तुलसी और भगवान श्री हरि की उपासना करने का बहुत अधिक महत्व बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की उपासना श्रीहरि स्वीकार जरूर करते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा तुलसी पूजा विधि (Kartik Purnima Tulsi Puja Vidhi)
कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर संभव ना हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद देवी तुलसी का पौधा और भगवान विष्णु की अर्चना करें।

उनके समक्ष दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें। साथ ही आप घर में हवन करें और फिर भगवान सत्यनारायण की कथा कहें या सुनें। अब उन्हें खीर और फलों का भोग लगाकर प्रसाद बांटें। शाम को भगवान विष्णु की आरती करने के बाद तुलसी जी की आरती भी करें और दीपदान करें। घर की चौखट पर दीपक जलाएं।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त (Kartik Purnima Puja Ka Shubh Muhurat)
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 29 नवंबर, रविवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्‍त – 30 नवंबर, सोमवार को दोपहर 03 बजे तक।
कार्तिक पूर्णिमा संध्या पूजा का मुहूर्त – 30 नवंबर, सोमवार – शाम 5 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 37 मिनट तक।

तुलसी माता के मंत्र (Tulsi Mata Ke Mantra)
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः।
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

ॐ सुभद्राय नमः।

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

ॐ सुप्रभाय नमः

मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी।
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

 

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