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कार्तिक पूर्णिमा 2017: जानिए कब है स्नान का मुहूर्त और क्यों जरूरी है दान

Kartik Purnima 2017 Puja Muhurat: कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह की सभी प्रक्रिया समाप्त हो जाती है और इस दिन माता तुलसी की विदाई होती है।

कार्तिक माह में स्नान का विशेष महत्व होता है लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 3 नवंबर दोपहर 1 बजे से शुरु होकर 4 नवंबर सुबह 10 बजे तक है। कार्तिक माह में किए स्नान का फल, एक हजार बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान, वैशाख माह में नर्मदा नदी पर करोड़ बार स्नान के बराबर माना जाता है। जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वहीं फल कार्तिक माह में किसी भी पवित्र नदी के तट पर स्नान करने पर मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय होने के पश्चात् स्नान का महत्व कम हो जाता है। इसलिए इस दिन सभी मनुष्यों को सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। ऋषि अंगिरा ने स्नान के बारे में लिखा है कि इस दिन जातकशास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए स्नान करते समय सबसे पहले हाथ पैर धोना चाहिए। इसके बाद आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें। दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें। इसी प्रकार यदि जातक यज्ञ और जप कर रहा हैं तो पहले संख्या का संकल्प कर लें फिर जप और यज्ञादि कर्म करें। इस दिन जातक को मां गंगा, भगवान शिव, विष्णु जी और सूर्य देव का स्मरण करते हुए नदी या तालाब में स्नान के लिए प्रवेश करना चाहिए। स्नान करते समय आधा शरीर तक जल में खड़े होकर विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए।

गृहस्थ व्यक्ति को काला तिल तथा आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है लेकिन विधवा तथा संन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मिट्टी को लगाकर ही स्नान करना चाहिए। इस दौरान भगवान विष्णु जी के ॐ अच्युताय नम:, ॐ केशवाये नम:, ॐ अनंताय: नम: मन्त्रों का लगातार जाप करते रहना चाहिए। घर पर स्नान करे तो नहाने के पानी में गंगा जल अवश्य डालें। स्नान के बाद भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दें। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद दीपदान का बहुत महत्व है। इस दिन गरीबों को भोजन करना अच्छा माना जात है।

इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन और वस्त्र दान का भी बहुत ही ज्यादा महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता हैं हमें उसका अनंत गुना लाभ मिलता है, इसका पुण्य कभी भी समाप्त नहीं होता है । इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रत्येक मनुष्य को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए और घर के सभी छोटे बड़े सदस्यों से भी दान करवाना चाहिए।

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