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Kamada Ekadashi Vrat Katha, Vidhi: कामदा एकादशी व्रत से ब्रह्म हत्या के पापों से भी मिलती है मुक्ति, जानिए व्रत कथा और विधि

Kamada Ekadashi Vrat Katha, Vidhi: कामदा एकादशी का वर्णन विष्णु पुराण में किया गया है। जिसके अनुसार जो मनुष्य यह व्रत रखता है, उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है।

श्री हरि।

Kamada Ekadashi Vrat Katha, Vidhi: कामदा एकादशी व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। हिन्दू कैलेंडर के मुताबित प्रत्येक माह में दो एकादशी पड़ती है। जिसमें एक शुक्ल पक्ष की एकादशी और दूसरी कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है। कामदा एकादशी का वर्णन विष्णु पुराण में किया गया है। जिसके अनुसार जो मनुष्य यह व्रत रखता है, उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है।

साल 2019 में कामदा एकादशी के लिए 15, अप्रैल (सोमवार) को व्रत रखा जाएगा। साथ इस व्रत का समापन अगले दिन पारण के बाद होगा। इस बार कामदा एकादशी के पारण के लिए शुभ मुहूर्त 16 अप्रैल 2019 को सुबह 05 बजकर 58 मिनट से लेकर 08 बजकर 31 मिनट तक है। आगे जानते हैं व्रत-विधि और कथा।

कामदा एकादशी व्रत-विधि

  • कामदा एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि चढ़ाना चाहिए।
  • 24 घंटे बिना पानी पिए भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन करना चाहि।
  • कामदा एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा का खास महत्व है। इसलिए ब्राह्मण भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए।
  • ब्राह्मण भोजन के बाद ही व्रती को भोजन करना चाहिए।

कथा: विष्णु पुराण के अनुसार प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर था। वहां पुण्डरीक नामक राजा राज्य करते थे। इस नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर और गंधर्व का भी वास था। उनमें से ललिता और ललित के बीचा अत्यंत आपसी स्नेह था। एक दिन गंधर्व ललित दरबार में गान कर रहा था कि अचानक उसे पत्नी ललिता की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय और ताल तीनों बिगड़ने लगे। इस गलती को कर्कट नामक नाग ने जान लिया और यह बात राजा को बता दी। राजा को बड़ा क्रोध आया और ललित को राक्षस होने का श्राप दे दिया।

ललिता को जब यह पता चला तो उसे अत्यंत दुःख हुआ। वह श्रृंगी ऋषि के आश्रम में जाकर प्रार्थना करने लगी। श्रृंगी ऋषि बोले कि हे गंधर्व कन्या! अब चैत्र शुक्ल एकादशी आने वाली है, जिसका नाम ‘कामदा एकादशी’ है। कामदा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य का फल अपने पति को देने से वह राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा। ललिता ने मुनि की आज्ञा का पालन किया और एकादशी व्रत का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त होकर अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त हुआ।

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