Kalashtami Vrat 2026: वैदिक पंंचांग के अनुसार कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने का विधान है। यह दिन काल भैरव को समर्पित होता है। यहां हम बात करने जा रहे हैं मार्च में पड़ने वाले कालाष्टमी व्रत के बारे में जो इस साल 11 मार्च को मनाया जाएगा। मान्यता है विशेष कामों में सफलता पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही शत्रुओं पर विजय मिलती है।  वहीं भगवान भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि…

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कालाष्टमी 2026 की सही तिथि (Kab Hai Kalashtami Vrat 2026)

फ्यूचर पंचांग के मुताबिक चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च 2026 को देर रात 01:55 बजे होगी। वहीं इस तिथि का समापन 12 मार्च 2026 को सुबह 04:18 बजे होगा। हिंदू धर्म में अधिकतर व्रत उदयातिथि के आधार पर रखे जाते हैं. इस कारण मासिक कालाष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026 को रखा जाएगा।

कालाष्टमी शुभ मुहूर्त (Kalashtami Shubh Muhurat)

कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। निशा काल का शुभ मुहूर्त देर रात 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक है। वहीं इस दिन दुर्लभ शिववास योग का संयोग भी बन रहा है।

पंचांग

  • सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 03 मिनट पर
  • सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 56 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 15 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से 02 बजकर 46 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 54 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

कालाष्टमी धार्मिक महत्व

इस दिन जो भी व्यक्ति पूरे दिन व्रत रखकर काल भैरव की आराधना करता है। उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। साथ ही  काल भैरव की पूजा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं। साथ ही अज्ञात भय खत्म होता है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। वहीं भगवान भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। तंत्र साधना करने वाले साधक कालाष्टमी पर काल भैरव देव की कठिन साधना करते हैं।

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