कालाष्टमी व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से काल भैरव और भगवान शिव की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। कालाष्टमी के दिन भक्त उपवास रखकर शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि व सुरक्षा की कामना करते हैं। खासतौर पर रात्रि पूजा और भैरव मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। यहां हम बात करने जा रहे हैं मई के कालाष्टमी व्रत के बारे में जो इस साल 9 मई को रखा जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…
कालाष्टमी तिथि मई 2026
फ्यूचर पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 मई को दोपहर 2:02 बजे से होगी और यह 10 मई को दोपहर 3:06 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यता कहती है कि कालाष्टमी व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन अष्टमी तिथि मध्यरात्रि यानी निशिता काल में आती है। यही कारण है कि इस बार व्रत 9 मई को रखा जाएगा।
कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
इस दिन निशिता काल 11:56 पी एम से 12:38 ए एम, मई 10 तक रहेगा। इस बीच में भगवान काल भैरव की पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
कालाष्टमी व्रत मंत्र
शिवपुराण में कालभैरव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना फलदायी माना गया है।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!
अन्य मंत्र
ओम भयहरणं च भैरव:।
ओम कालभैरवाय नम:।
ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
ओम भ्रं कालभैरवाय फट्।
भगवान काल भैरव की आरती | Kaal Bharav Aarti Lyrics in Hindi
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौर देवी कृत सेवा।।
प्रभु जय भैरव देवा।।
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
जय भैरव देवा…वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।।
जय भैरव देवा।।
तुम बिन देवा, सेवा सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन से सब दुःख खोवे ॥
जय भैरव देवा।।
तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी।
कृपा कीजिये भैरवजी, करिए नहीं देरी।।
जय भैरव देवा।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू दमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत।
जय भैरव देवा।।
कालभैरवजी की आरती जो कोई जन गावे।
कहे धरनी धर मानुष मनवांछित फल पावे।।
जय भैरव देवा।।
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