Kalashtami Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। आपको बता दें कि कालाष्टमी व्रत बाबा काल भैरव को समर्पित होता है। काल भैरव भोलेनाथ के अवतार माने जाते हैं। शिवपुराण के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कालभैरव का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है कि काल भैरव के व्रत का पालन करने से भक्तों की समस्त इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और तंत्र-मंत्र या जादू-टोने से जुड़ी हर प्रकार की बाधा समाप्त हो जाती है। यहां हम बात करने जा रहे हैं फरवरी के कालाष्टमी व्रत के बारे में, जो 9 फरवरी को रखा जाएगा। वहीं इस दिन बाबा काल भैरव की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। वहीं यहां पूजा के बाद काल भैरव की व्रत कथा पढ़ना जरूरी माना जाता है। वर्ना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं काल भैरव की व्रत कथा के बारे में…
कालाष्टमी व्रत कथा (Kalashtami Vrat Katha In Hindi)
एक समय श्रीहरि विष्णु व ब्रह्मा के मध्य विवाद उत्पन्न हुआ, कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है। यह विवाद इस स्तर तक बढ़ गया, कि समाधान हेतु भगवान शिव एक सभा का आयोजन करना पड़ा। इसमें ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध संत आदि उपस्थित थे। सभा में लिए गए एक निर्णय को भगवान विष्णु तो स्वीकार कर लेते हैं, किंतु ब्रह्मा जी संतुष्ट नहीं होते. वे महादेव का अपमान करने लगते हैं। शांतचित्त शिव यह अपमान सहन न कर सके व ब्रह्मा द्वारा अपमानित किए जाने पर उन्होंने रौद्र रूप धारण कर लिया। भगवान शंकर प्रलय रूपी होने लगे व उनका रौद्र रूप देख कर तीनों लोक भयभीत हो गए। भगवान शिव के इसी रूद्र रूप से भगवान भैरव प्रकट हुए। वह श्वान पर सवार थे, उनके हाथ में दंड था। हाथ में दंड होने के कारण वे “दंडाधिपति” कहे गए। भैरव जी का रूप अत्यंत भयंकर था। उन्होंने ब्रह्म देव के पांचवें सिर को काट दिया, तब ब्रह्म देव को उनके गलती का स्मरण हुआ। तत्पश्चात ब्रह्म देव व विष्णु देव के मध्य विवाद समाप्त हुआ व उन्होंने ज्ञान को अर्जित किया, जिससे उनका अभिमान व अहंकार नष्ट हो गया।
Kalashtami 2026: 9 फरवरी को कालाष्टमी व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, भैरव स्तुति और धार्मिक महत्व
काल भैरव अष्टकम्
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम्।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है।
