Jyeshtha Month 2026, Adhik Maas 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ तप, दान और आध्यात्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये माह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता से लेकर सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है। इस बार का ज्येष्ठ माह काफी खास है, क्योंकि इस बार एक नहीं बल्कि पूरे दो माह का होगा। बता दें कि इस माह अधिक मास पड़ रहा है। ऐसे में हिंदू नववर्ष 13 महीनों का होने वाला है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह वट सावित्री से लेकर पद्मिनी एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। आइए जानते हैं ज्येष्ठ माह दो मास होने के कारण से लेकर धार्मिक महत्व और व्रत त्योहार…
ज्येष्ठ माह 2026 तिथि (Jyeshtha Month 2026 Date)
इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का संयोग हो रहा है। बता दें कि ज्येष्ठ अधिक मास 2 मई 2026 से शुरू होकर 29 जून 2026 तक रहेगा। बता दें कि 17 मई से लेकर 15 जून तक अधिक मास रहेगा।
ज्येष्ठ माह 2026 का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व है। इस बेहद पुण्य और पवित्र माना जाता है। इस अवधि में तप, तप और साधना के लिए विशेष होता है। इस दौरान की गई पूजा का कई गुना अधिक फल की प्राप्ति हो सकती है। इस माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा इस माह घड़ा, जल, अन्न का दान करने लाभकारी हो सकता है। इस माह शनिदेव का जन्म से लेकर हनुमान-श्री राम मिलन से लेकर सूर्य और वरुण देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, इस माह सूर्यदेव को जल अर्पित करने से वह अति प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा पद्म पुराण के अनुसार इस माह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करने के साथ जप तप करने से कई तरह के पापों से मुक्ति मिल सकता है।
अधिक मास 2026 (Adhik Maas 2026)
बता दें कि विक्रम संवत 2083 में अधिक मास पड़ने वाला है। जिसके कारण पूरे दो माह के ज्येष्ठ माह पड़ेंगे। अधिक मास का कारण हिंदू पंचांग की गणना प्रणाली में निहित है, जो मुख्य रूप से चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है। जहां एक सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। इस वजह से हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बनता रहता है। यह अंतर धीरे-धीरे बढ़कर लगभग 32 महीने 16 दिनों में एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
ज्येष्ठ माह 2026 में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार
13 मई 2026, बुधवार- अपरा एकादशी
16 मई 2026, शनिवार- वट सावित्री व्रत, शनि जयंती
27 मई, 2026, सोमवार- पद्मिनी एकादशी
28 मई, 2026, मंगलवार- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
30 मई, बुधवार- अधिक पूर्णिमा
01 जून, 2026,शुक्रवार- वैशाख पूर्णिमा व्रत
03 जून, 2026, मंगलवार- संकष्टी चतुर्थी
11 जून, 2026,बुधवार- परम एकादशी
14 जून, 2026,गुरुवार- ज्येष्ठ अधिक अमावस्या
25 जून, 2026,गुरुवार-निर्जला एकादशी
29 जून 2026, सोमवार- वट सावित्री व्रत
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
