आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं शक्तिपीठ ज्वाला देवी मंदिर के बारे में, जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। ज्वाला देवी मंदिर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर मां दुर्गा के उन दिव्य स्थलों में शामिल है, जहां बिना तेल और बाती के सदियों से अग्नि की ज्योतियां प्रज्वलित होती आ रही हैं। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां मां सती की जिह्वा गिरी थी, इसलिए इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रहती है। आइए जानते हैं इतिहास और महत्व…
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ज्वाला देवी मंदिर का इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव माता सती के देह को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को कई भागों में विभाजित किया था। माना जाता है कि जिस स्थान पर माता की जिह्वा गिरी, वहीं आज ज्वाला देवी मंदिर स्थित है। यहां धरती से निकलने वाली नौ प्राकृतिक ज्योतियों को देवी के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने भी यहां की दिव्य ज्योति को बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने मां के चरणों में स्वर्ण छत्र अर्पित किया था।
ज्वाला देवी मंदिर का धार्मिक महत्व
ज्वाला देवी मंदिर को आस्था और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है। यहां भक्त मां से सुख-समृद्धि, संतान, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं। मंदिर में जलती हुई अखंड ज्योतियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। नवरात्रि में यहां विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
ज्वाला देवी मंदिर में नौ ज्योतियां सदियों से बिना तेल, घी या बाती के प्राकृतिक रूप से जल रही हैं। .यह देवियों के 9 स्वरूपों का का प्रतीक मानी जाती हैं, जो महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी। हैं
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ज्वाला देवी मंदिर कैसे पहुंचे
ज्वाला देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग तीनों सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर आप हवाई जहाज से आ रहे है तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गगल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। वहीं पास रेलवे स्टेशन ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन है। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से मिल जाती है।
डिस्क्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक कथाओं और सामान्य स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है। किसी भी मान्यता या परंपरा को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या जानकार की सलाह अवश्य लें। स्थान, यात्रा और दर्शन से जुड़ी जानकारी समय के अनुसार बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी जरूर प्राप्त करें।
