Guru Gochar 2026, Guru Drishti on Shani: साल 2026 का सबसे बड़ा ग्रह गोचर यानी गुरु के अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर गए हैं। गुरु के इस राशि में आने से 12 राशियों के साथ-साथ वैश्विक स्तर में देखने को मिसने वाला है। भाग्य के कारक गुरु बृहस्पति के कर्क राशि में जाने से वह मीन राशि पर विराजमान शनि पर पूर्ण दृष्टि डाल रहे हैं। शनि पर गुरु की दृष्टि होने से कई राशि के जातकों के लंबे समय से रुका काम पूरे होने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं गुरु के कर्क राशि में प्रवेश करके शनि पर दृष्टि पड़ने से मेष से लेकर मीन राशि पर कैसा हो सकता है असर…
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देवताओं के गुरु बृहस्पति 2 जून को सुबह 02:25 ए एम बजे कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे और 31 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे। इसके बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में गुरु की दृष्टि शनि पर अक्टूबर तक रहने वाली है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु बृहस्पति की हर एक दृष्टि के प्रभावों के बारे में शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है। आमतौर पर बृहस्पति जिस राशि में स्थित होते हैं, उस राशि को सुदृढ़ करते हैं और शुभ दृष्टि के कारण हर राशि पर असर डालते हैं। बता दें कि बृहस्पति की पंचम, सप्तम और नवम दृष्टि पूर्ण मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर शनि की तृतीय, सप्तम और दशम दृष्टि पूर्ण प्रभाव वाली होती है।
2 जून से लेकर 31 अक्टूबर तर बृहस्पति का प्रत्यक्ष प्रभाव मीन राशि पर रहेगा। इसके अलावा शनि की पूर्ण दृष्टि भी इस राशि पर पड़ रही है। इस समय मंगल, शनि और राहु की विशेष स्थिति एक प्रकार का पाप कर्तरी योग बना रही है। लेकिन बृहस्पति की शुभ दृष्टि इस योग के नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम कर रही है। ऐसे में गुरु की दृष्टि पड़ने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक असर देखने को मिलने वाला है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
