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Jitiya Vrat 2019: जितिया व्रत रखने वाले जान लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा विस्तार से

Jivitputrika, Jitiya Vrat Vidhi And Muhurat: साल 2019 में जितिया व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है। यह व्रत तीन दिन चलता है जिसमें पहले दिन यानी सप्तमी को नहाय खाय, दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन इस व्रत का पारण किया जाता है। जानें व्रत की पूजा विधि (Jitiya Vrat Ki Vidhi) और मुहूर्त...

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जीवित्‍पुत्रिका (Jivitputrika Vrat) या जितिया (Jitiya Vrat) पुत्र की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। ये व्रत खास तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल में रखा जाता है। इस व्रत वाले दिन महिलाएं निर्जला रहती हैं यानी कि अन्न और जल कुछ ग्रहण नहीं किया जाता है। कुछ इलाकों में इसे जिउतिया भी कहा जाता है। साल 2019 में जितिया व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है। यह व्रत तीन दिन चलता है जिसमें पहले दिन यानी सप्तमी को नहाय खाय, दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन इस व्रत का पारण किया जाता है। जानें व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त…

जितिया व्रत मुहूर्त (Jitiya Puja Muhurat): जितिया व्रत 21 सितंबर से लेकर 23 सितंबर तक है। व्रत का मुख्‍य दिन अष्‍टमी 22 सितंबर को है।
अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर 2019 को रात 08 बजकर 21 मिनट से
अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 22 सितंबर 2018 को रात 07 बजकर 50 मिनट तक

जितिया व्रत रखने वाले जरूर पढ़ें ये कथा, तभी संपन्न होगी पूजा

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जितिया व्रत विधि (Jitiya Vrat Puja Vidhi): जितिया व्रत एक दिन पहले से शुरू हो जाता है। लेकिन इस व्रत की अष्टमी तिथि विशेष होती है। इस तिथि में ही मुख्य रूप से व्रत रखा जाता है ये तिथि 22 सितंबर को है। इस दिन महिलाएं सुबह स्‍नान के बाद पूजा-पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं। अष्टमी तिथि को प्रदोषकाल में महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती है। प्रदोष काल का समय 4:28 से रात 7:32 तक है। पूजा करने से पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें अथवा गाय के गोबर से पूजा स्थल को अच्छे से लीपकर स्वच्छ कर लें। साथ ही एक छोटा सा तालाब वहां बना लें और उसके निकट एक पाकड़ की डाल खड़ी कर दें। अब जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर दें। उन्हें धूप-दीप, अक्षत, पुष्प, फल आदि अर्पित करें। इसके साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से सियारिन और चील की प्रतिमा बनाई जाती है। प्रतिमा बन जाने के बाद उसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगायें। पूजन समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुननी चाहिए। व्रत के तीसरे दिन महिलाएं पारण करती हैं। सूर्य को अर्घ्‍य देने के बाद महिलाएं अन्‍न ग्रहण कर सकती हैं। मुख्‍य रूप से पारण वाले दिन झोर भात, मरुवा की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है।

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