Jitiya Vrat 2026 Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत कहा जाता है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। परंपरा के अनुसार, इसमें महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और अगले दिन पारण किया जाता है। आइए जानते हैं जितिया व्रत के नहाय-खाय से लेकर व्रत का पारण तक…
जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा शुभ मुहूर्त (Jitiya Vrat 2026 Puja Muhurat/Jivitputrika Vrat Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त – 04:38 एम से 05:26 एम
प्रातः सन्ध्या – 05:02 एम से 06:15 एम
अभिजित मुहूर्त – 11:46 एम से 12:34 पीएम
गोधूलि मुहूर्त – 06:05 पीएम से 06:29 पी एम
सायाह्न सन्ध्या – 06:05 पीएम से 07:18 पी एम
जितिया व्रत 2026 का चौघड़िया समय (Jitiya Vrat 2026 choghadiya Muhurat/Jivitputrika Vrat choghadiya Muhurat)
| दिन का चौघड़िया | रात का चौघड़िया |
| काल: सुबह 6:14 से 7:43 तक | लाभ: शाम 6:07 से रात 7:38 तक |
| शुभ: सुबह 7:43 से 9:12 तक | उद्वेग: रात 7:38 से 9:09 तक |
| रोग: सुबह 9:12 से 10:41 तक | शुभ: रात 9:09 से 10:40 तक |
| उद्वेग: सुबह 10:41 से दोपहर 12:11 तक | अमृत: रात 10:40 से 12:11 तक |
| चर: दोपहर 12:11 से 1:40 तक | चर: रात 12:11 से 1:42 तक |
| लाभ: दोपहर 1:40 से 3:09 तक | रोग: रात 1:42 से 3:13 तक |
| अमृत: दोपहर 3:09 से शाम 4:38 तक | काल: सुबह 3:13 से 4:44 तक |
| काल: शाम 4:38 से 6:07 तक | लाभ: सुबह 4:44 से 6:15 तक |
जितिया व्रत 2026 पारण का समय (Jitiya Vrat 2026 Paran Time/Jivitputrika Vrat Paran Time)
द्रिक पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा।
जितिया व्रत 2026 पूजा विधि
नहाय-खाय से हुई व्रत की शुरुआत
जितिया व्रत आरंभ होने से एक दिन पहले से नहाय-खाय की परंपरा होती है, जो आज से शुरू हो चुकी है। आज माताएं स्नान आदि करने के बाद पूजा घर की साफ-सफाई करती हैं। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ कुलदेवता और अपने इष्ट देव का स्मरण करके सात्विक भोजन करती हैं। आज भोजन में कद्दू की सब्जी, भात, नोनी की रोटी आदि बनाई जाती हैं। अलग-अलग परिवारों में नहाय-खाय के भोजन और नियम अलग हो सकते हैं।
अष्टमी तिथि को लें व्रत का संकल्प
- अष्टमी तिथि को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद पूजा स्थल में दीपक जला लें। फिर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संतान की खुशहाली की कामना करते हुए जीवित्पुत्रिका व्रत का संकल्प लें।
- अगर आपके यहां ओठगन या सरगी खाने की परंपरा है, तो सूर्योदय से पहले ही इसका सेवन कर लें। इसके साथ ही निर्जला व्रत आरंभ कर दें।
- पूजा के लिए एक साफ चौकी पर लाल या पीला रंग का कपड़ा बिछा लें। इसके बाद दूर्वा से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाएं। आप चाहे, तो बाजार में मिलने वाली तस्वीर भी रख सकती हैं। इसके बाद फूल, माला, सिंदूर, अक्षत, रोली, दूर्वा, नैवेद्य, मिठाई, फल आदि चढ़ा दें। इसके साथ ही लाल या पीले रंग का जितिया धागा भी चढ़ा दें।
फिर घी का दीपक, धूप जलाकर जितिया व्रत कथा पढ़ें या फिर सुनें। कथा सुनने के बाद आरती कर लें और भगवान से संतान की रक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना कर लें। - पूजा के बाद जितिया व्रत पूरे दिन और रात निर्जला रखें। इसके साथ ही जितिया धागा धारण कर लें। शाम को पुन: पूजा करने के साथ रात को जागरण, भजन, लोक परंपराएं करें। अगले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद पारण के शुभ मुहूर्त में सात्विक भोजन खाकर अपने व्रत को खोल लें। कई जगहों पर जितिया धागा को व्रत के पारण के बाद उतार दिया जाता है।
जितिया व्रत मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत की आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप…
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप….
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप…
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप…
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप…
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप
डिस्क्लेमर- जितिया व्रत की विधि, धागा धारण या उतारने की विधि हर क्षेत्र या परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इस आर्टिकल में एक सामान्य विधि बताई गई है। इसलिए आप घर में जिस विधि से वर्षों से जितिया की पूजा की जाती है। उसी को प्राथमिकता दें।
