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Jitiya Vrat: आज है जितिया व्रत, इस विधि से करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और आरती

आज के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना कर निर्जला व्रत करती हैं। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर साल आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जितिया व्रत किया जाता है।

Jitiya Vrat 2020, jitiya Vrat Puja Vidhi, jitiya Vrat Pujan Vidhiहर साल आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 10 सितंबर, बृहस्पतिवार को किया जाएगा।

Jitiya Vrat 2020 : हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर साल आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जितिया व्रत किया जाता है। इस दिन को महालक्ष्मी व्रत समापन के रूप में भी मनाया जाता है। यह व्रत संतान के हित की कामना से किया जाता है। जितिया व्रत में सप्तमी के दिन नहाए खाए, अष्टमी के दिन जितिया व्रत और नवमी के दिन व्रत खोला जाता है यानी पारण किया जाता है। आज के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना कर निर्जला व्रत करती हैं।

जितिया व्रत पूजन विधि (Jitiya Vrat Pujan Vidhi/ Jitiya Vrat Puja Vidhi):

जितिया व्रत के दिन व्रती स्त्रियां पवित्र हो साफ कपड़े पहनें। जीमूतवाहन की पूजा के लिए जीमूत वाहन की कुशा से बनी हुई प्रतिमा को विराजमान करें। फिर धूप और दीप जलाएं। ईश्वर का ध्यान करते हुए चावल और फूल अर्पित करें। इसके बाद मिट्टी में गाय का गोबर मिलाकर चील और सियारिन की प्रतिमा बनाएं। इनके माथे पर लाल कुमकुम का तिलक लगाएं।

फिर हाथ जोड़कर ध्यान से जितिया व्रत की कथा सुनें। इसके बाद जीमूतवाहन की आरती करें। आरती करने के बाद उन्हें भोग लगाएं और ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें। इस दिन सूर्यास्त के बाद कुछ ना खाएं। इस व्रत का पारण अगले दिन यानी नवमी तिथि को होता है। अगले दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
जितिया व्रत शुभ मुहूर्त (Jitiya Vrat Shubh Muhurat/ Jitiya Vrat Puja Ka Shubh Muhurat)

पूजा का शुभ मुहूर्त – 10 सितंबर, बृहस्पतिवार – 02:05 पी एम से 11 सितंबर, शुक्रवार – 04:34 पी एम तक
पारण का समय – 11 सितंबर, शुक्रवार – सूर्योदय से 12:00 पी एम तक

 जितिया व्रत आरती (Jitiya Vrat Aarti)

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ओम जय कश्यप॥

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ओम जय कश्यप॥

सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ओम जय कश्यप॥

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ओम जय कश्यप॥

कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ओम जय कश्यप॥

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ओम जय कश्यप॥

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ओम जय कश्यप॥

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