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9 साल की उम्र में जुबानी याद कर लिया था शिव तांडव स्रोत, जानें- जया शर्मा कैसे बनीं जया किशोरी?

जया किशोरी अपनी खास कथा वाचन शैली के लिए देश-विदेश में जानी जाती हैं। उनका असली नाम जया शर्मा है। क्या आप जानते हैं कि उनका नाम जया किशोरी कैसे पड़ा?

jaya kishori ji, jaya kishori ji name, jaya kishori real nameजया किशोरी अपनी मोटिवेशनल स्पीच, भजन और कथाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

Jaya Kishori Ji/ Jaya Kishori : जया किशोरी अपनी मोटिवेशनल स्पीच, भजन और कथाओं के लिए देश विदेश में जानी जाती हैं। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि जया किशोरी का असली नाम जया शर्मा है। उन्हें जया किशोरी नाम मिलने की कहानी भी दिलचस्प है।

जया किशोरी जब 9 साल की थीं तब से ही वह भगवान की कथाओं, स्तोत्रों और भजनों को गाया करती थीं। नौ साल की उम्र में ही उन्हें शिव तांडव स्रोत जुबानी याद था। भगवान के प्रति उनके ऐसे भाव देखकर उनके गुरु पंडित गोविंद राम मिश्र ने अपनी शिष्या जया शर्मा का नाम जया किशोरी रख दिया। किशोरी जी श्री राधा रानी का एक नाम है।

आपको बता दें कि जया शर्मा को यह नाम देने के पीछे बड़ी वजह यह रही कि जया किशोरी भगवान श्री कृष्ण को श्री राधा रानी की तरह ही अपने प्रियतम के रूप में पूजती हैं। उनके गुरु ने बचपन से ही उनके मन में भगवान श्री कृष्ण के लिए श्री राधा रानी जैसा प्रेम देखा और यह तय किया कि जया शर्मा को अब से जया किशोरी के नाम से पुकारा जाएगा। जया किशोरी के गुरु जी उन्हें प्रेम से किशोरी जी भी कहते हैं।

गौर ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने की वजह से हमेशा से ही जया किशोरी के परिवार में भक्ति भाव का माहौल रहा है। इसलिए उन्हें बहुत छोटी उम्र से रुद्राष्टकम, लिंगाष्टकम और मधुराष्टकम कंठस्थ हैं। एक इंटरव्यू में जया किशोरी ने बताया कि उनके दादा-दादी और उनके नाना-नानी उन्हें अक्सर भगवान की कथाएं सुनाया करते थे। उस समय वह कथाएं बहुत रुचि से सुना करती थीं और आज भी उन कथा प्रसंगों को याद करके श्रीमद्भागवत कथा और नानी बाई का मायरा की कथा के दौरान सुनाया करती हैं।

आपको बता दें कि जया किशोरी बचपन में डांसर बनना चाहती थीं। लेकिन घर के बड़े-बुजुर्ग ऐसा नहीं चाहते थे, इसलिए किशोरी जी ने भगवान की कथाओं और भजनों का रास्ता चुना और आज वह इस बात से बहुत खुश हैं कि उन्हें ईश्वर ने अपनी कथाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए चुना हैं। किशोरी जी कहती हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं उन्हें इस मार्ग पर लगाया है और जब तक संभव होगा वह उनकी सेवा करती रहेंगी।

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