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पेरेंट्स और बच्चों के बीच जनरेशन गैप के कारण हो जाते हैं झगड़े, जानिए इससे कैसे निपटें

Jaya Kishori Motivational Speech About Generation Gap: जया किशोरी (Jaya Kishori) कहती हैं कि अगर आप एक चीज समझ लें कि जीवन में परिवर्तन आता ही रहता है। तो इस समस्या का हल हो सकता है।

Motivational Speech, jaya kishori, Generation Gap problems, jaya kishori Motivational Speechकथावाचक जया किशोरी से जानिए जनरेशन गेप के कारण आ रही समस्याओं को कैसे कम कर सकते हैं।

Generation Gap Problems: परिवर्तन संसार का नियम है। यानि समय के साथ चीजों में बदलाव होना स्वभाविक है। यही वजह है कि बच्चों और माता-पिता के बीच में बदलते समय के कारण कुछ दूरियां आ जाती हैं। जिसे हम जनरेशन गेप कहते हैं। कभी माता-पिता अपने बच्चों को नहीं समझ पाते तो कभी बच्चे अपने माता-पिता को नहीं समझते। जिस कारण कई बार रिश्तों में खटास भी आ जाती है। जानिए कथावाचक जया किशोरी से कि कैसे हम जनरेशन गेप के कारण आ रही दूरियों को खत्म कर सकते हैं…

समय के साथ आ रहे परिवर्तन को समझें: जया किशोरी कहती हैं कि अगर आप एक चीज समझ लें कि जीवन में परिवर्तन आता ही रहता है। तो इस समस्या का हल हो सकता है। आपके पिता से आपकी कई चीजें मेल नहीं खाती होंगी। ऐसी ही चीजें आपकी अपने बच्चे के साथ होंगी। आपको लगेगा कि आपका बच्चा आपकी बात समझ नहीं रहा है। ये चीजें बदलेंगी कब जब आप दोनों समझेंगे की मेरा समय और उसका समय एकदम अलग है। इसलिए विचार अलग होना स्वभाविक है। यह भी पढ़ें- जया किशोरी से जानिए परेशानियों से निपटने का सही तरीका

मां बाप इस बात का रखें ध्यान: बच्चा एक अलग परिवेश में पल रहा है और हम एक अलग परिवेश में थे। तो वो हमारे जैसा रिएक्ट करे ये जरूर नहीं। घर में भले ही हम बच्चे को उसी परिवश में रखते हैं लेकिन जब वह बच्चा बाहर जा रहा है तो उसे स्कूल में, दोस्तों से, फोन, टेलीविजन, वेब सीरीज से आप नहीं जानते कि वो कितने अलग परिवेश में है। आज जिस तरह के एक्सपोजर बच्चे को मिलते है उससे जो चीज उसे उसकी उम्र में समझनी चाहिए होती है उसे वह 10 साल पहले ही जान चुका होता है। इसलिए आप उसे अपने परिवेश नें ढाल नहीं सकते बस उसे एकस्पेट कर सकते हैं।

बच्चे इस बात का रखें ध्यान: यही बच्चों को भी ध्यान में रखना चाहिए कि अगर आपके पिता आपकी बात समझ नहीं पा रहे हैं तो ऐसा रिएक्ट करना कि आपको पता नहीं है या आप समझना नहीं चाहते, गलत है। आपको समझना होगा कि जो व्यक्ति 50 साल से एक विचार के साथ चल रहा है वो कैसे अपना विचार तुरंत बदल ले। हम यहां 20 साल की उम्र में अपना विचार नहीं बदलना चाहते तो जो 50 साल से वही काम कर रहा है तो उसका मन नई चीज को कैसे एकस्पेट करेगा। तो ऐसे में दोनों को दोनों की खुशियों का ध्यान रखकर एक-एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। यह भी पढ़ें- सफल होने के लिए Genius होना जरूरी नहीं, जरूरत है…

पेरेंट्स और बच्चों के बीच ऐसे बनेगा सही तालमेल: पिता को बच्चों के उन डिसिजन में सहयोग करना होगा जो आपके हिसाब से सही नहीं लेकिन बच्चे के समय के हिसाब से वे सही है। कई बार माता-पिता बच्चों से कह देते हैं कि ये चीज गलत है तो गलत है बहस न करो। ऐसा नहीं करना है अपने बच्चों को समझाएं कि कोई चीज क्यों गलत है उसका कारण बताएं। फिर आखिरी निर्णय अपने बच्चे पर छोड़ दें। ऐसा करने से बच्चा अपना कदम सोच समझकर उठाएगा। वहीं कुछ चीजें बच्चों को भी ऐसी करनी पड़ेंगी जो आपके माता-पिता को खुशी दे। एक-एक छोटे-छोटे स्टेप आपके रिश्ते को करीब ला सकते हैं।

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