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14 साल की उम्र से कथा करने वालीं जया किशोरी ने बताया कैसे बना जाता है कथावाचक

Jaya Kishori on how to Become a Spiritual Orator : अगर किसी क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो उसके लिए मेहनत करना बहुत जरूरी है। अगर आप कथावाचक बनना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आप ईश्वर और उनके वचनों-कथाओं से संबंधित पुस्तकें पढ़ें।

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जया किशोरी 14 साल की उम्र से कथा कर रही हैं।
Jaya Kishori on How to Become a Spiritual Orator : जया किशोरी अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से आस्क जया किशोरी (#AskJayaKishori) नाम का सोशल मीडिया कैंपेन चलाती हैं। इस कैंपेन में वह अपने भक्तों के सवालों का जवाब देती हैं। हाल ही में इस कैंपेन से जुड़ा एक वीडियो उनके ऑफिशल युट्यूब चैनल (Jaya Kishori Official YouTube Channel) यानी आई एम जया किशोरी (iamjayakishori) पर शेयर किया गया। इस वीडियो में युग नाम का उनका एक भक्त किशोरी जी से यह सवाल पूछता नजर आता है कि किस तरह से कथावाचक बना जा सकता है?

छोटी उम्र के एक बालक का यह सवाल सुनकर किशोरी जी खुश होकर यह बताती हैं कि न सिर्फ कथावाचक बल्कि कुछ भी बनने के लिए यह बहुत जरूरी है कि व्यक्ति पांच बातों का ध्यान रखें। इनमें सबसे पहला गुरु बताया है। किशोरी जी कहती हैं कि यह बहुत जरूरी है कि जिस कार्य में निपुणता हासिल करना चाहते है उस क्षेत्र से जुड़ा हुआ गुरु बनाएं। क्योंकि गुरु ही सही मार्गदर्शन कर सकते हैं। क्षेत्र के बारे में सही-गलत की समझ भी गुरु के माध्यम से ही मिलती है। इसलिए सबसे पहले गुरु बनाना चाहिए।

दूसरी बात बताते हुए किशोरी जी कहती हैं कि यह बहुत जरूरी है कि हम गुरु के लायक बनें। इस वीडियो में वह कहती हैं कि लोग गुरु तो बना लेते हैं लेकिन जब गुरु के वचनों को मानने की बात आती है तो वह इस कार्य को करने में अक्षम नजर आते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि गुरु की बातों को मानने के लिए हम खुद को इस लायक बनाएं। ताकि गुरु के बताए आदर्शो पर चलकर सफलता हासिल की जा सके।

किशोरी जी कहती हैं कि अगर किसी क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो उसके लिए मेहनत करना बहुत जरूरी है। अगर आप कथावाचक बनना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आप ईश्वर और उनके वचनों-कथाओं से संबंधित पुस्तकें पढ़ें। ताकि आपको उनके बारे में पता चल सके और आप अन्य लोगों को भी ईश्वर के बारे में बता सकें। अध्ययन के लिए खूब मेहनत करें। अच्छे संत-महात्माओं की ढेर सारी किताबें पढ़ें। क्योंकि अगर आप ईश्वर के विषय में ही नहीं जानते होंगे तो कथा में ईश्वर की कथा सुनने आए लोगों को क्या बताएंगे।

चौथा और अंतिम आदर्श बताते हुए किशोरी जी कहती हैं कि यह बहुत जरूरी है कि कुछ भी बनने से पहले आप अच्छा इंसान बनें। क्योंकि जो इंसान अच्छा होता है और जिसके कर्म अच्छे होते हैं वह दूसरों के जीवन को प्रभावित करने में सक्षम होता है। ऐसे व्यक्ति के व्यक्तित्व की छाप बहुत जल्द दूसरे लोगों पर पड़ती हैं। इसलिए सबसे पहले अच्छा इंसान बनें फिर उसके बाद कुछ और बनने की ओर चलें।

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